वह कहावत तो सुनी ही होगी, प्यासे कुएं के पास जाते हैं। लेकिन उज्जैन सिंहस्थ में कुआं प्यासों के पास जा रहा है। एक समूह ऐसा भी है जो खोज-खोज कर लोगों को पिला रहा है पानी।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेद्र गिरी महाराज ने आज मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उज्जैन में सिंहस्थ की व्यवस्थाएं ठीक नहीं की गई तो साधु-संतो के सभी अखाड़े आगामी 9 मई को होने वाले दूसरे शाही स्नान का बहिष्कार कर सिंहस्थ से वापस लौट जाएंगे।
मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध धार्मिक नगरी उज्जैन में प्रति 12 वर्ष में लगने वाला और एक माह तक चलने वाला, दुनिया में हिंदुओं का सबसे बड़ा मेला सिंहस्थ कुंभ जूना अखाड़ा के साधु-संतों के आज सुबह पवित्र क्षिप्रा नदी में शाही स्नान करने के साथ शुरू हो गया।
मध्यप्रदेश के शहर उज्जैन में 22 अप्रैल से सिंहस्थ मेला शुरू हो रहा है। धार्मिक नगरी उज्जैन में क्षिप्रा नदी बहती है जिसमें श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं। यह अलग बात है कि क्षिप्रा में पानी की कमी के चलते इसमें नर्मदा का जल मिलाया गया है।
मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में 22 अप्रैल से शुरू होने वाले सिंहस्थ मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सरकार शहर में करीब 34,000 शौचालय बनाने की योजना पर काम कर रही है। इससे खुले में शौच की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी।