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Search Result : "सीताराम येचुरी"

गहरे संकट से भिड़ना होगा वाम को

गहरे संकट से भिड़ना होगा वाम को

सीताराम येचुरी भारतीय वामपंथी आंदोलन के एक जाने-माने चेहरा हैं। हिंदी, अंग्रेजी, तेलुगु, बांग्ला भाषा में मजबूत पकड़ रखने के साथ एक-दो और भाषाओं के ज्ञाता है 62 वर्षीय येचुरी। मिलनसार स्वभाव वाले इस मृदुभाषी वाम नेता के कंधों पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की गहरे संकट में फंसी नाव को निकालने की जिम्मेदारी है।
येचुरी डूबते जहाज का कप्तान: शिवसेना

येचुरी डूबते जहाज का कप्तान: शिवसेना

माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी को एक डूबते जहाज का कप्तान बताते हुए शिवसेना ने मंगवार को कहा कि वाम दल देश में अपनी प्रासंगिकता खो बैठा है और इसमें एक मजबूत विपक्ष के तौर पर उठ खड़े होने की हिम्मत नहीं है।
सीताराम येचुरी बने माकपा के महासचिव

सीताराम येचुरी बने माकपा के महासचिव

माकपा के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी को पार्टी के नये महासचिव के तौर पर सर्वसम्मति से चुन लिया गया। पार्टी ने अपने 21 वें सम्मेलन के समापन के मौके पर आज अपनी केंद्रीय कमेटी के 91 सदस्यों और 16 सदस्यीय पोलित ब्यूरो को भी चुना।
येचूरी के नेतृत्व में भाकपा के साथ क्या माकपा का होगा विलय

येचूरी के नेतृत्व में भाकपा के साथ क्या माकपा का होगा विलय

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की कमान सीताराम येचूरी के हाथों में आने के कई निहितार्थ हैं। सबसे पहला एजेंडा भाकपा के साथ विलय का संभावना पर विचार करना है। भाकपा का एक धड़ा लंबे समय से यह चाह रहा है, येचूरी ने इस ओर इशारा भी किया है। संकट के दौर में वाम दलों का एका एक लोकप्परिय समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।
कौन होगा माकपा का अगला महासचिव

कौन होगा माकपा का अगला महासचिव

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) माकपा की विशाखापत्तनम में चल रही राष्ट्रीय कांग्रेस में अगला महासचिव कौन होगा, ये सबसे बड़ा सवाल है। सम्मेलन में शिरकत करने वाले प्रतिनिधियों से लेकर देश भर में वामपंथ पर नजर रखने वाले लोगों के लिए यह गहरी दिलचस्पी का विषय है कि क्या सीताराम येचुरी माकपा के नए महासचिव बनेंगे।
राज्यसभा में हार ने सरकार की मुश्किलें बढ़ाईं

राज्यसभा में हार ने सरकार की मुश्किलें बढ़ाईं

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राज्यसभा में मंगलवार को विपक्ष के एक संशोधन के पारित हो जाने और इस विषय पर सरकार की करारी हार से भले ही केंद्र सरकार को सीधा खतरा न हो मगर इसने इस बात का संकेत तो दे ही दिया है कि बीमा विधेयक, कोयला विधेयक या फिर भूमि अधिग्रहण विधेयकों पर सरकार की राह कतई आसान नहीं होगी।