भारतीय कुश्ती जगत के लिए शनिवार का दिन शानदार रहा रहा। एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप में भारत के लिए बजरंग पुनिया ने गोल्ड मेडल जीत लिया। उन्होंने फ्रीस्टाइल के 65 किग्रा वर्ग में दक्षिण कोरिया के ली सुंग चुल को हराया।
रियो ओलंपिक की रजत पदक विजेता पीवी सिंधु बुधवार को आसान जीत के साथ एशियाई बैडमिंटन चैंपियनशिप के दूसरे दौर में पहुंच गयी। वुहान (चीन) में खेली जा रही इस प्रतियोगिता में साइना नेहवाल को शुरू में ही बाहर का रास्ता देखना पड़ा।
भारतीय पहलवान सुशील कुमार ने ओलंपिक तैयारियों से बाहर किए जाने के कदम को सही ठहराया है। टारगेट ओलंपिक पोडियम (टॉप्स) योजना से बाहर किये गये ओलंपिक पदकधारी सुशील कुमार ने गुरुवार को कहा कि जब वह खेल से ही बाहर हैं तो सरकार से धनराशि लेने का कोई मतलब नहीं था। सुशील के अलावा लंदन ओलंपिक के कांस्य पदकधारी योगेश्वर दत्त को भी योजना से बाहर कर दिया है। फोगाट बहनें -गीता और बबीता- को भी इसमें जगह नहीं दी गयी।
भारत ने अप्रैल-मई में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप के लिये कुछ स्थापित और दो नये मुक्केबाजों को टीम में जगह दी है लेकिन दो बार के पदक विजेता एल. देवेंद्रों सिंह इसमें स्थान नहीं बना पाये। विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता शिव थापा (60 किग्रा) और विकास कृष्ण (75 किग्रा) के साथ पूर्व राष्ट्रमंडल चैंपियन मनोज कुमार (60 किग्रा) अपेक्षानुरूप 30 अप्रैल से सात मई के बीच उज्बेकिस्तान के ताशकंद में होने वाली चैंपियनशिप के लिये टीम में चुने गये। यह महाद्वीपीय चैंपियनशिप इस वर्ष के आखिर में होने वाली विश्व चैंपियनशिप के लिये क्वालीफाईंग प्रतियोगिता भी है।
रियो ओलिंपिक में देश को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाली महिला रेसलर साक्षी मलिक हरियाणा सरकार से नाराज हैं। साक्षी ने ट्वीट कर सरकार के प्रति यह नाराजगी जाहिर की है। साक्षी ने कहा कि मेडल का वादा मैंने पूरा किया, हरियाणा सरकार अपना वादा कब पूरा करेगी। साथ ही उसने सवाल किया कि मेरे पदक जीतने के बाद हरियाणा सरकार की ओर से की गईं सारी घोषणाएं क्या सिर्फ मीडिया के लिए थी? रेसलर ने इस ट्वीट में सीएमओ ऑफिस, हरियाणा के खेल मंत्री अनिल विज और केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल को टैग किया है।
पाकिस्तान की सेना भारत को असंतुलित करने और कश्मीर विवाद पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मध्यस्थ बनाने की कोशिश के तहत भारत पर हमला करने वाले आतंकवादी संगठनों की लगातार मदद कर रही है।
दागी सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला को आजीवन अध्यक्ष नियुक्त करने के लिए चौतरफा आलोचनाओं का सामना करने के बाद भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को यह विवादास्पद फैसला वापस लेने को बाध्य होना पड़ा है।