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नीतीश का बस चले तो पूरे देश में लागू करा दें शराबबंदी

नीतीश का बस चले तो पूरे देश में लागू करा दें शराबबंदी

पूरे देश में शराबबंदी लागू कराने की इच्छाशक्ति के बहाने ही सही, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देश का प्रधानमंत्री बनने की ख्वाहिश भी जता दी है। नीतीश ने शराबबंदी को पहले झारखंड और उत्तर प्रदेश में लागू करने के साथ ही पूरे देश में इस पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की है। इसके बाद इसे वह महाराष्ट्र, उत्तराखंड और राजस्‍थान में लागू कराना चाहते हैं। इसी बहाने वह इन राज्यों में महागठबंधन की भी उम्मीद कर रहे हैं।
चर्चा : चुनावी अवश्वमेघ यज्ञ की तमन्ना। आलोक मेहता

चर्चा : चुनावी अवश्वमेघ यज्ञ की तमन्ना। आलोक मेहता

नरेंद्र मोदी चुनावी चुनौतियों को विजय यात्रा के रूप में मानते रहे हैं। उनके आत्मविश्वास और दिन-रात अभियान चलाने की क्षमता का लोहा उनके सहयोगी ही नहीं विरोधी तक मानते हैं। वह 2014 से निरंतर चुनावी सभाओं को संबोधित करते रहे हैं। चुनावी अश्वमेघ यज्ञ के लिए घोड़ा तैयार कर वह अखिल भारतीय स्तर पर एक ही अभियान में एकछत्र राज का प्रयास भी करना चाहते हैं।
डीए: मोदी सरकार का चुनावी राज्यों पर दबाव, ममता बौखलाईं

डीए: मोदी सरकार का चुनावी राज्यों पर दबाव, ममता बौखलाईं

कर्मचारियों के लिए छह फीसद महंगाई भत्ते (डीए) की किश्त की घोषणा कर केन्द्र सरकार ने चुनावी राज्यों वाली सरकारों पर दबाव बना दिया है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केन्द्र की मोदी सरकार की घोषणा से बौखलाई बताई जा रही हैं, क्योंकि वहां सरकारी कर्मचारियों के स्तर पर चुनौतियां ज्यादा हैं। बंगाल सरकार के कर्मचारियों तनख्वाह केन्द्र से अब 54 फीसद कम हो गई है। अब ममता बनर्जी राज्य सरकार के कर्मचारियों को खुश करने का रास्ता ढूंढ रही हैं। यही हाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में भी है। हालांकि, इन राज्यों में तनख्वाहें छह से 12 फीसद ही कम हैं। इसलिए, कर्मचारियों की नाराजगी की चिंता नेताओं को कम है।
विधानसभा की जोर-आजमाइश में बुजुर्ग नेता

विधानसभा की जोर-आजमाइश में बुजुर्ग नेता

भारतीय जनता पार्टी में जहां 75 साल से ज्यादा की उम्र वाले नेताओं को राजनीति से रिटायर करने की बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह कर चुके हैं, वहीं इस बार के विधानसभा चुनाव में कई राज्यों में विभिन्न पार्टियों के वयोवृद्ध नेता मैदान में उतर रहे हैं। वाममोर्चा और कांग्रेस में कई उम्मीदवार ऐसे हैं, जो 80 साल से ज्यादा की उम्र के हैं। केरल से माकपा के वयोवृद्ध नेता वीएस अच्युतानंदन मैदान में हैं, जो 92 साल के हैं। बंगाल वाममोर्चा के कई ऐसे नेता हैं, जो 75 पार कर चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु 90 साल से ज्यादा की उम्र तक राजनीति में सक्रिय रहे। दोनों राज्यों में कांग्रेस के भी कई नेता ऐसे हैं, जो उम्र के आठवें पड़ाव में पहुंच चुके हैं।
अमित शाह दोबारा बने भाजपा अध्‍यक्ष, निर्विरोध चुने गए

अमित शाह दोबारा बने भाजपा अध्‍यक्ष, निर्विरोध चुने गए

जैसा कि उम्‍मीद जताई जा रही थी अमित शाह को एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की कमान मिल गई है। अमित शाह को तीन साल के पूर्ण कार्यकाल के लिए निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है। गौरतलब है कि आउटलुक ने 18 जनवरी को ही अमित शाह के दोबारा अध्‍यक्ष बनाए जाने के फैसले की खबर दे दी थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में  ट्रम्प की बढ़त और मजबूत

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प की बढ़त और मजबूत

राष्ट्रपति पद के चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बनने के लिए दावेदारी पेश कर रहे वरमोंट के सीनेटर बर्नी सैंडर्स आयोवा में लोकप्रियता के मामले में हिलेरी क्लिंटन को पछाड़कर सबसे आगे पहुंच गए हैं जबकि रियल एस्टेट व्यापारी डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने निकटतम रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ बढ़त और मजबूत कर ली है। राष्ट्रपति पद के प्राइमरी चुनाव के लिए आयोवा में अब से करीब एक सप्ताह बाद पहली बार मतदान होगा।
उत्तर प्रदेश में अखिलेश का धोबी-पाट

उत्तर प्रदेश में अखिलेश का धोबी-पाट

साल 2012 के विधानसभा चुनाव में मुख्य‍मंत्री अखिलेश यादव जब विधानसभा चुनाव में युवाओं की फौज लेकर चल रहे थे तब पार्टी के कई बुजुर्ग नेता यह कहते सुने जा रहे थे कि नया जोश है कुछ कर नहीं पाएंगे। लेकिन उसी जोश ने समाजवादी पार्टी के इतिहास में सर्वाधिक सीटें दीं और इसका श्रेय अखिलेश यादव और उनकी टीम को मिला।
पिछड़ा वर्ग आरक्षण सरकार के लिए चुनौती

पिछड़ा वर्ग आरक्षण सरकार के लिए चुनौती

बिहार विधानसभा चुनाव में पिछड़ा वर्ग को मिले आरक्षण के एक मुद्दे ने देश की सियासत ही बदल दी। चुनाव के दौरान जिस तरह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण की समीक्षा के बयान की जो मतदाताओं में प्रतिक्रिया हुई, उसे देखते हुए भाजपा और राजग के साथ खड़े पिछड़े वर्ग के नेता सियासी अहमियत समझ अब इस वर्ग के हितों की बात खुलकर करने लगे हैं। हालांकि भाजपा नेताओं ने बार-बार इस बात को दुहराया कि आरक्षण की समीक्षा नहीं की जाएगी लेकिन इसका खास सियासी असर नहीं पड़ा।
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