पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में गोलीबारी की तीन अगल-अलग घटनाओं में अल्पसंख्यक शिया मुसलमान समुदाय के तीन सदस्यों सहित चार लोगों की मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए है।
देश के संवैधानिक प्रमुख की हैसियत से राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राजधानी दिल्ली में गहराते संवैधानिक संकट को देखते हुए अब और निष्क्रियता और चुप्पी की आरामतलबी गवारा नहीं कर सकते। केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना और आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार के उसके खिलाफ विधान सभा का सत्र बुलाने के निर्णय से केंद्र और दिल्ली सरकार का टकराव अब उस कगार पर पहुंच गया है कि बिना न्यायपालिका या राष्ट्रपति जैसी उच्च संवैधानिक संस्थाओं की पंचायती के किसी परिपक्व संवैधानिक हल की उम्मीद नहीं।
पाकिस्तान ने गुरुवार को कहा कि वह भारत के साथ अच्छे पड़ोसी के रिश्ते की नीति पर अमल कर रहा है, हालांकि दोनों देशों के बीच दि्वपक्षीय संवाद की प्रकिया अभी बहाल नहीं हुई है।
गो मांस पर प्रतिबंध के मुद्दे पर केंद्रीय संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास ने कहा, 'यदि कोई बीफ का मीट खाए बिना मर रहा है, तो वह पाकिस्तान या अरब देश चला जाए। उनकी इस देश में कोई जगह नहीं है। ‘ उसके बाद से लेकर आज तक नकवी के इस बयान की सोशल मीडिया पर खूब छीछालेदर हो रही है। इसके जवाब में पाकिस्तान से आएशा गज्दर ने फेसबुक पर लिखा- बहुत खूब आ जाओ..आ जाओ सारे।
पाकिस्तान के ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के ठिकाने से मिले अलकायदा के एक दस्तावेज में साल 2008 में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा किए गए मुंबई हमले को जाबांज फिदाई बताया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग और प्रधानमंत्री ली क्विंग से बातचीत में दोनों देशों के संबंधों में समस्या पैदा करने वाले मसलों को भी उठाया। इस दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चीन की ओर से बड़े पैमान पर निवेश पर उन्होंने चिंता जताई जबकि अरुणाचल प्रदेश के लोगों को चीन द्वारा नत्थी वीजा देने के संदर्भ में वीजा मसले पर ठोस प्रगति की उम्मीद चाही।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुखिया शहरयार खान भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट संबंधों को फिर बहाल करने के प्रयास के तहत भारत आए और यहां भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अधिकारियों से मिले।
भारत में कभी भी किसी प्रधानमंत्री ने अपनी पहली पारी में ही इतने कम समय में इतने अधिक देशों का दौरा नहीं किया जितना नरेंद्र मोदी ने पिछली मई से अब तक एक साल के वक्त में किया है। पूरी दुनिया के अपने दौरों में मोदी ने सभी बड़े नेताओं के सामने भारत को निवेश के लिहाज से आकर्षक जगह के रूप में पेश किया मगर इन सभी नेताओं से बातचीत में एक विषय जरूर उठा और वह ये कि हठधर्मी चीन से कैसे निपटा जाए।