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रस्किन की कहानियां

रस्किन की कहानियां

रस्किन बॉन्ड ऐसे लेखक हैं, जिनकी रचनाओं को हर उम्र के लोग चाव से पढ़ते हैं। इसकी मुख्य वजह उनकी कहानियों में पठनीयता का होना है। कहानियों का स्वतः प्रवाह, रोचकता के साथ प्रकृति से जुड़ाव को अनूठी शैली में रचने का उनका अपना अंदाज है।
मिसिंग पर्सन पुस्तक हिंदी में

मिसिंग पर्सन पुस्तक हिंदी में

हर व्यक्ति का अपना एक अतीत होता है। बल्कि कहना गलत न होगा कि हमारा वर्तमान हमारे अतीत की नींव पर टिका होता है। ऐसे में अगर हमारे भीतर से अतीत विस्मृत हो जाए तो हमारा पूरा वजूद डावांडोल होने लगता है। हम अपनी पहचान के संकट से आक्रांत हो उठते हैं। ऐसे में किसी संवेदनशील व्यक्ति का अपने अतीत की तहों में उतरकर स्मृतियों के रेशे तलाशना स्वाभाविक है।
कन्हैया के भी क्या कहने, खुद को भगत सिंह और गांधी मान बैठे

कन्हैया के भी क्या कहने, खुद को भगत सिंह और गांधी मान बैठे

जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्‍हैया कुमार ने एक बार फिर जेएनयू प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई है। कन्हैया ने विश्‍वविद्यालय के वीसी के उस बयान का विरोध किया है जिसमें उन्होंने कैंपस में जारी भूख हड़ताल को गैरकानूनी कहा था।
जीवन के आयामों का आइना पॉल की तीर्थयात्रा

जीवन के आयामों का आइना पॉल की तीर्थयात्रा

तरक्की के इस दौर में, सभ्यता और आधुनिकता के बीच तालमेल बनाने की होड़ मची हुई है। इस दौर में परिवारों का ढांचा भी बदल गया है। संयुक्त परिवारों की जटिलताओं के दौर से निकलने के बाद तरक्की पसंद लोगों ने एकल परिवार की नई परिकल्पना संसार को दी थी।
कन्हैया पर विवादित बयान, भाजयुमो नेता निष्कासित

कन्हैया पर विवादित बयान, भाजयुमो नेता निष्कासित

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के बारे में एक विवादित बयान देने वाले भारतीय जनता युवा मोर्चा के बदायूं जिलाध्यक्ष कुलदीप वार्ष्णेय को शनिवार को पार्टी की जिला इकाई से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया।
चर्चा : अपने हाथ क्यों जलाएं ?। आलोक मेहता

चर्चा : अपने हाथ क्यों जलाएं ?। आलोक मेहता

विरोध, प्रदर्शन, आंदोलन, लोकतंत्र में अनुचित नहीं माने जाते। लेकिन अपने खेत-खलिहान-घर-आंगन को सुरक्षित रखने के साथ मासूम बच्चों के स्कूलों, बीमार और घायलों का उपचार करने वाले अस्पतालों, गांव से कस्बों तक पहंुचाने वाली बसों अथवा जानमाल की सुरक्षा के लिए बनाए गए थानों को आग लगाने के बजाय सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी तो समाज की है।
मुट्ठी के मुहाने पर तरक्की का आसमान

मुट्ठी के मुहाने पर तरक्की का आसमान

‘शाश्वत विकास से हरियाली, स्वच्छ वातावरण, सभी के लिए समृद्धि, युद्ध के भयरहित शांति और विश्व में सभी देशों में सभी नागरिकों के लिए खुशनुमा स्थान को प्राप्त करने का सामर्थ्य मिलता है।’ स्वर्गीय डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम के यही वे आखिरी शब्द हैं जो उन्होंने 17 जुलाई 2015 को शिलांग के एक व्याख्यान में कहे थे।
पोस्टर पर देखिए कपूर एंड संस को

पोस्टर पर देखिए कपूर एंड संस को

करण जौहर की आने वाली फिल्म कपूर एंड संस की चर्चा जोरो पर है। फिलहाल करण ने पोस्टर दिखा कर दर्शकों को अपनी फिल्म देखने का न्योता दे डाला है।