1 जनवरी 1958 को उत्तरांचल के अल्मोड़ा जिले में जन्में हरिसुमन बिष्ट हिंदी साहित्य के जानेमाने कहानीकार हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल से हिंदी में स्नातकोत्तर और आगरा विश्वविद्यालय, आगरा से पी.एच.डी की उपाधि।
उनकी प्रमुख प्रकाशित रचनाओं में उपन्यास : ममता, आसमान झुक रहा है, होना पहाड़। कहानी संग्रह : सफ़ेद दाग, आग और अन्य कहानियां, मछरंगा, बिजूका। यात्रा विवरण : अंतर्यात्रा हैं।
सन 1983 में उनके द्वारा संपादित पुस्तक ‘अपनी जबान में कुछ कहो' को साहित्यिक श्रेणी में सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उपाध्याय उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्याल में प्राध्यापक हैं। अध्यापन से पहले वह प्रखर पत्रकार रह चुके हैं। अमर उजाला और हिंदुस्तान अखबार में काम करते हुए उन्होंने रिपोर्टिंग के क्षेत्र में जो भी विविधताएं महसूस कीं उन्हें बाद में कविता में ढाला। उनकी खबरों की समझ और कविता की संवेदना मिल कर जो काव्य पैदा करती है, वह कविता को नई भाषा देती है।
अवधनारायण मुद्गल शीर्षक कहानी की शुरुआत 28 फरवरी 1936 को आगरा के ऐमन्पुरा में उनके जन्म से हुई। शिक्षा शास्त्री और साहित्य रत्न के अलावा मानव शास्त्र में एम.ए. की डिग्री लेने वाले अवध जी के बारे में कम लोग जानते हैं कि वह प्रगतिशील साहित्य के गहन अध्येता थे। गोर्की, चेखव, मार्क्स, एंगल्स और लेनिन के साथ साथ वह भारतीय दर्शन और पुरा कथा साहित्य के भी मर्मज्ञ थे।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि पूर्वोत्तर भारत के राज्य देश के खास हिस्से हैं। अपनी छोटी आबादी के बावजूद इन राज्यों का देश में काफी बड़ा योगदान है। इस क्षेत्र के लोगों ने आजादी की लड़ाई में सक्रिय हिस्सेदारी की थी।
माधव जोशी पेशे से कार्टूनिस्ट हैं। उनका पहला ही उपन्यास ही बेस्ट सेलर रहा। मराठी भाषा में लिखा गया यह उन्यास, एक पिता की आत्मकथा नाम से आया और पाठकों ने इसे हाथों हाथ लिया। उनकी कार्टून की धार बहुत ही पैनी और सटीक होती है। इसके विपरीत उनकी रचनाएं मानवीय संवेदनाओं के साथ-साथ रिश्तों की अलग परिभाषा गढ़ती है।
अंतरराष्ट्रीय मूर्ख दिवस के मौके पर उज्जैन के कालिदास अकादमी के मुक्ताकाशी रंगमंच पर 45 वें अखिल भारतीय टेपा सम्मेलन का भव्य आयोजन हुआ। इसमें टीवी के जाने-माने हास्य अभिनेता अली असगर ने शिरकत की। इन्होंने दादी की वेशभूषा में मंच से दर्शकों को खूब हंसाया।
बीसवां देवीशंकर अवस्थी सम्मान युवा आलोचक जीतेंद्र गुप्ता को उनकी पुस्तक ‘भारतीय इतिहासबोध का संघर्ष और हिंदी प्रदेश’ के लिए प्रतिष्ठित लेखिका कृष्णा सोबती द्वारा 5 अप्रैल 2015 को रवींद्र भवन में साहित्य जगत की जानी-मानी हस्तियों की मौजूदगी में प्रदान किया गया।
दिल्ली में जश्ने-बहार न्यास के इस कार्यक्रम की सफलता ही यह है कि पूरे साल श्रोता इस कार्यक्रम का इंतजार करते हैं। देश-विदेश से आए उर्दू अदब शायर इस कार्यक्रम में चार चांद लगा देते हैं।