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कला-संस्कृति

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

मिसरा बेशक यह साहिर लुधियानवी के गीत का है लेकिन अफसानानिगार सआदत हसन मंटो पर सटीक बैठता है। ताउम्र ढोंग, तमाशे और साहित्य की राजनीति से दूर रहने वाले मंटो ने कहा था- ‘ हर शहर में बदरौएं और मोरियां मौजूद हैं जो शहर की गंदगी को बाहर ले जाती हैं। हम अगर अपने मरमरी गुसलखानों की बात कर सकते हैं, अगर हम साबुन और लैवेंडर का जिक्रकर सकते हैं तो उन मोरियों और बदरौओं का जिक्र क्यों नहीं कर सकते जो हमारे बदन की मैल पीती हैं।‘ मंटो की 100वीं जन्मशताब्दी से लेकर आज तक उनके नाम पर उनके तथाकथित मुरीदों ने राजनीति, तमाशा और ढोंग ही किया है। मंटो के इन मुरीदों को वह सब चाहिए जो मंटो को नहीं चाहिए था। मंटो के माएने तो यह दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है।
एक शाम वतन की राह पर

एक शाम वतन की राह पर

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के स्पेशल सीपी और चर्चित बांसुरी वादक मुक्तेश चंद्र जी ने पहली बार देश भक्ति के गीतों पर अपनी बांसुरी की तान छेड़ी।
मप्र हिंदी साहित्य सम्मेलन पुरस्कार समारोह

मप्र हिंदी साहित्य सम्मेलन पुरस्कार समारोह

मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रतिष्ठित भवभूति अलंकरण एवं वागीश्वरी पुरस्कार समारोह का गरिमामय आयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के वीथि संकुल सभागार, भोपाल में विख्यात कवि, कथाकार फिल्मकार उदयप्रकाश की अध्यक्षता, वरिष्ठ साहित्यकार-शिक्षाविद प्रोफेसर रमेश दवे के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।
कहानी - भेड़िया

कहानी - भेड़िया

दिल्ली में जन्मी योगिता यादव का पहला कहानी संग्रह भारतीय ज्ञानपीठ के आठवें नवलेखन पुरस्कार से सम्मनित किया गया और बाद में वहीं से प्रकाशित हुआ। कहानी झीनी झीनी रे चदरिया को अपने खास शिल्प के कारण आठवें अखिल भारतीय कलमकार कहानी प्रतियोगिता में दि्वतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्हें जम्मू कश्मीर के विशेष सांस्कृतिक अध्ययन के लिए संस्कृति मंत्रालय से जूनियर फैलोशिप मिल चुकी है। वह पिछले 13 सालों से पत्रकारिता में भी सक्रीय हैं। फिलवक्त दैनिक जागरण के जम्मू संस्करण में कार्यरत।
आयरलैंड से भारत यात्रा साइकिल पर

आयरलैंड से भारत यात्रा साइकिल पर

रोमांचपसंद डेवरेला मर्फी ने सन 1965 में साइकिल पर आयरलैंड से भारत की यात्रा की थी। इसी यात्रा के अनुभव को उन्होंने अपनी पुस्तक ‘फुल टिल्ट’ में लिखा है।
डॉ. जमुना पई की किताब का विमोचन

डॉ. जमुना पई की किताब का विमोचन

देश की जानी मानी त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. जमुना पई की पहली पुस्तक, ‘नो वन हैज टू नो’ का विमोचन प्रकाशक हार्पर कॉलिंस और सूर्या होटल ने किया। इस मौके पर अलग-अलग विधाओं से जुड़े कई लोगों ने शिरकत की।
आधी आबादी की आवाज

आधी आबादी की आवाज

महिलाओं को आवाज उनके विचारों से मिलती है, उनके विचार उनकी भावनाओं से उपजते हैं और भावनाएं जब उफान पर होती है तब एक स्त्री कविता रचती है। दलितों और महिलाओं के संघर्ष को आवाज देने और उनके अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था रमणिका फाउंडेशन और दलित लेखक संघ कविता और कहानी पाठ के कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।
एक शाम पिता के नाम

एक शाम पिता के नाम

पिछले दिनों प्रसिद्ध कवि, चिंतक कैलाश वाजपेयी का निधन हो गया। उनकी कविताओं में आध्यात्म, प्रकृति और जीवन के अलग रंग दिखते थे। उनकी कविताओं की गूढ़ता ही उस रचना की खूबसूरती थी। उनकी बेटी अनन्या वाजपेयी ने अलग ढंग से पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी कविताओं को संगीत में ढाल कर सुर के साथ इनका पाठ किया गया।
समीक्षा - उपन्यास डार्क हॉर्स

समीक्षा - उपन्यास डार्क हॉर्स

‘डार्क हार्स’ लेखक नीलोत्पल मृणाल का पहला उपन्यास तो है ही, साथ ही इसके प्रकाशक ‘शब्दारंभ प्रकाशन’ की भी पहली किताब है। जिस तरह से इस उपन्यास के लोकार्पण के महज सप्ताह भर के भीतर ही पहले संस्करण की सारी प्रतियां पाठकों के पास पहुंच गईं और दूसरे संस्करण के लिए प्रीबुकिंग जारी है, इस ऐतबार से उम्मीद है कि यह उपन्यास हिंदी साहित्य में बेस्ट सेलर’ हो सकता है। हालांकि, प्रूफ की गलतियों को लेकर प्रकाशक को सोचना होगा, जो खाने में कंकर की तरह कहीं-कहीं चुभती हैं, लेकिन वहीं यह भी सत्य है कि किसी प्रकाशक के लिए प्रूफ की गलतियों को सुधारना एक अनवरत यज्ञ की तरह होता है, जो हमेशा जारी ही रहता है।
कहानी - गली नंबर दो

कहानी - गली नंबर दो

अंजू शर्मा मूलतः कवयित्री हैं। उनकी कविताएं आसपास की घटनाओं और जीवन के अनुभवों से गुजर कर शब्दों का चोला पहनती हैं। उनकी कविता चालीस साला औरतें पिछले दिनों बहुत चर्चितं रही थी। हाल ही कहानी लिखना शुरू करने वाली अंजू की कहानियां भी ऐसे ही आसपास के परिवेश से अलग संसार बुनती हैं। उनकी कहानियों में मानवीय रिश्तों की गंध और माहौल का खूबसूरत चित्रण होता है।
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