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अंग्रेजो के जमाने में लीज पर दी गई  संपत्तियों की नहीं है कोई सूची

अंग्रेजो के जमाने में लीज पर दी गई संपत्तियों की नहीं है कोई सूची

अंग्रेजो के समय कितनी संपत्ति लीज गई थी और उनका क्या स्टेट्स है। इस बात की कोई सूची डीडीए व अन्य किसी भूमि प्रबंधन निकाय पर नहीं है। यह खुलासा केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में सुनवाई के दौरान हुआ। आयोग ने भू-प्रबंधन से जुड़े निकायों को राजधानी की लीज संपत्तियों की संकलित सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
अंग्रेजों के एजेंट थे सावरकरः काटजू

अंग्रेजों के एजेंट थे सावरकरः काटजू

एक ओर जहां केंद्र सरकार आज देश में विनायक दामोदर सावरकर जयंती मना रही है वहीं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और भारतीय प्रेस परिषद के पूर्व अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू ने सावरकर के स्वतंत्रता सेनानी होने पर ही सवाल उठा दिए हैं और कहा है कि वह अंग्रेजों के एजेंट थे।
दुबई में नए जमाने का नया फतवा

दुबई में नए जमाने का नया फतवा

चोरी करना तो हमेशा से ही खराब है। लेकिन नए जमाने में चोरी की परिभाषाएं भी बदल गई हैं। किसी सामान को बिना पूछे उठा लेना, जेबकतरी जैसी बातों को भूल जाइए। अब वाई फाई चोरी भी गंदी बात है।
सत्ता के ऊपर ज्ञान, व्यक्तियों के ऊपर विवेक

सत्ता के ऊपर ज्ञान, व्यक्तियों के ऊपर विवेक

चुनिंदा नायकों या खलनायकों की भूमिका पर जरूरत से ज्यादा जोर देने के कारण इतिहास का सम्यक विवेचन नहीं हो पाता। जैसे गांधी, नेहरू, पटेल, जिन्ना और माउंटबेटन पर ज्यादा जोर देने से हमें भारत विभाजन के बारे में कई जरूरी प्रश्‍नों के उत्तर नहीं मिलते। मसलन, देसी मुहावरे में आम जनता को अपनी बात समझाने में माहिर और उनमें आजादी के लिए माद्दा जगाने वाले गांधी अपने तमाम सद्प्रयासों के बावजूद नाजुक ऐतिहासिक मौके पर आम हिंदू-मुसलमान को एक-दूसरे के प्रति सांप्रदायिक दरार से बचने की बात समझाने में क्यों विफल रहे, नोआखली जैसी अपनी साक्षात उपस्थिति वाली जगह को छोडक़र? जिन्ना की महत्वकांक्षा और जिद को कितना भी दोष दें, कलकत्ता और अन्य जगहों का आम मुसलमान क्यों उनके उकसावे पर पाकिस्तान हासिल करने के लिए खून-खराबे पर उतारू हो गया?
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