घंटों कुर्सी पर बैठ कर काम करने वाले भले ही मजबूरी में बैठते हों या मर्जी से, उनमें एक चिंता बराबर बनी रहती है कि उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। अब यह सोच कर परेशान होने की जरूरत नहीं है।
एक गिरजाघर है जो मंदिर सा दिखता है... और मस्जिद सा भी। एक त्यौहार है जो मुगलों के दौर से चला आ रहा है... जी हां , महरौली का हर पत्थर कुछ बोलता है और हिंदुस्तान की नायाब गंगा-जमुनी तहजीब के तराने सुनाता है।
जिंबाब्वे दौरे के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्यों का एलान कर दिया गया है। अजिंक्य रहाणे को कप्तान बनाया गया है जबकि हरभजन सिंह और रॉबिन उथप्पा की टीम में वापसी हुई है। मजे की बात है कि टीम के दो वरिष्ठ खिलाड़ियों महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली को आराम दिया गया है।
प्रधानमंत्री के पास सारी शक्तियां केंद्रित होने की आलोचनाओं को खारिज करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि नरेंद्र मोदी स्वयं सारी बातों को समझकर एवं अनुभव लेकर काम करने वाले प्रधानमंत्री हैं।
कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार सहित पिछले 30 वर्ष के दौरान रहने वाली पूर्ववर्ती सरकारों की विदेशी धरती पर आलोचना इसलिए की क्योंकि देश में उनका विश्वास करने वाले अधिक लोग नहीं हैं।
अब आप हमारे ही घर में हमें पचास एकड़ में सिमट जाने पर बाध्य कर रहे हैं। पचास एकड़ की भीख हमें मंजूर नहीं है। हम आपके हाथ का खिलौना बनने से इंकार करते हैं, आपके अश्वमेध यज्ञ का घोडा बनने से इंकार करते हैं। हमारे नाम पर हिन्दू वोट कंसोलिडेट करना बंद करो। हम अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे।
हम गांव की चिंता में भटकते राहुल की चल और अचल तस्वीरें देखते हैं लेकिन अभी जानते कि गांवों को खुशहाल बनाने की उनकी नीतियां क्या हैं और वह इसके लिए कौन-कौन से कदम उठाने वाले हैं। हम गरीबों से राहुल के मेलजोल की कोशिशों के बाबत पढ़ते हैं और भरोसा करने को तैयार हैं कि वह उनकी हालत बिना किसी बिचौलिए के जानने चाहते हैं जिस देश में गरीबों के लिए बनी योजनाओं का लाभ अक्सर फर्जी गरीब उठा लेते हैं वहां अब हम जानना चाहते हैं कि राहुल सही गरीबों की शिनाख्त का कौन सा बेहतर तरीका अपनाएंगे। हम जानते हैं क अपने पिता राजीव गांधी की तरह राहुल गांधी भी चिंतित हैं कि गरीबों के लिए केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए प्रत्येक रुपये में सिर्फ 15 पैसे उन तक पहुंचते हैं लेकिन हमारी अब यह जानने की भी अपेक्षा है कि विचौलियों द्वारा चट हो रहे बाकी के 85 पैसे राहुल गरीबों तक कैसे पहुंचाएंगे। हम जानते हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना को राहुल गांधी अपनी यूपीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं और उसे पूरे देश में फैलाना चाहते हैं, शहरों मे भी, लेकिन हम यह भी जानना चाहते हैं कि वह इस योजना में व्यापक धांधली कैसे रोकेंगे, कैसे सुनिश्चित करेंगे कि सही लोगों को जॉब कार्ड मिले, काम पर आए मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी मिल पाए और इस योजना के जरिये गांवों में पक्के आधारभूत ढांचे भी बन पाएं।