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आवाज न उठाता तो नकली पत्रकार बनताःदेवांश मेहता

आवाज न उठाता तो नकली पत्रकार बनताःदेवांश मेहता

इन दिनों सेंट स्‍टीफन कॉलेज के छात्र देवांश मेहता सुर्खियों में हैं। दर्शनशास्त्र, तृतीय वर्ष के इस छात्र ने अपनी साख, सम्मान और अपने पर लगे आरोपों को पूरे कॉलेज के सामने खारिज करने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्याय मिल भी गया। देवांश अपनी जीत से काफी खुश है। उनका कहना है कि कोई कितना ही ताकतवर और ऊंची कुर्सी पर क्यों न बैठा हो, जुल्म के खिलाफ हर हाल में आवाज उठानी चाहिए। अपनी जीत के मौके पर देवांश ने आउटलुक से खास बातचीत कीः
कहां है आप का आंतरिक लोकतंत्र?

कहां है आप का आंतरिक लोकतंत्र?

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर नई तरह की जन आकांक्षाएं पैदा की थीं। लेकिन सरकार बनने के कुछ ही वक्त बाद पार्टी के भीतर का वैचारिक संघर्ष बाहर आ गया है। अरविंद केजरीवाल और समर्थकों के निशाने पर पार्टी नेता योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण हैं। इन दोनों नेताओं ने पार्टी के भीतर लोकतांत्रिकरण की बहस उठाई थी। साथ ही पार्टी में व्यक्ति के बजाय सामूहिक निर्णय पर जोर दिया था। अब पार्टी के भीतर नैतिक सवालों को भीड़ के तर्क के आधार पर हल करने की कोशिश की जा रही है।
आफ्सपा के खिलाफ संसद में उठी आवाज

आफ्सपा के खिलाफ संसद में उठी आवाज

लोकसभा में गैर कानूनी गतिविधियां निरोधक कानून और सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम के कथित दुरूपयोग का आरोप लगाते हुए उन्हें रद्द करने की मांग की गई।
किन्नौर में जेपी के ख़िलाफ़ किसानों का प्रदर्शन

किन्नौर में जेपी के ख़िलाफ़ किसानों का प्रदर्शन

हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत घाटी किनौर इन दिनों पहले जैसी नहीं है। नंगे पर्वतों से घिरे तापड़ी के मैदान में जेपी कंपनी के खिलाफ नारेबाजी से आसमान गूंज रहा है। यहां जिले की 18 पंचायतों के लगभग तीन हजार ग्रामीणों और कंपनी में काम कर रहे आठ सौ से ज्यादा मजदूरों ने प्रदर्शन किया। जेपी के खिलाफ खुले मोर्चे में अपना हक मांग रहे लोग लगातार बोल सठिया हल्ला बोल जेपी अपनी तिजोरी खोल के नारे लगा रहे थे।
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