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भारतीयों को मिले न मिले, विदेशियों को चिकित्सा देने की चिंता

भारतीयों को मिले न मिले, विदेशियों को चिकित्सा देने की चिंता

ये कोई छुपी हुई बात नहीं है कि भारत में डॉक्टरों और नर्सों की भयानक कमी है। वर्ष 2015 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक देश के चिकित्सा क्षेत्र को तत्काल करीब 20 लाख डॉक्टरों और 40 लाख नर्सों की जरूरत है। यही नहीं देश के प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में से 8 फीसदी में कोई डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ तक नहीं है।
चिकित्सा का पवित्र पेशा और डर का धंधा

चिकित्सा का पवित्र पेशा और डर का धंधा

मरीजों को डराकर कमाई करने का धंधा चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। मरीज की स्थिति को गंभीरतम दिखाने के लिए कई बार फर्जी तरीकों का सहारा भी लिया जाता है। कॉरपोरेट अस्पतालों में लागू प्रदर्शन आधारित भुगतान की व्यवस्‍था से स्थिति बदतर हो रही है।
‘तेजाब हमले के पीड़ितों का करो मुफ्त इलाज’

‘तेजाब हमले के पीड़ितों का करो मुफ्त इलाज’

सुप्रीम कोर्ट ने आज सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को पूर्व में जारी किए गए दिशा निर्देशों के अनुरूप तेजाब हमले के पीड़ितों के लिए मुआवजा, पुनर्वास और निःशुल्क चिकित्सा की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति एम.वाई. इकबाल और न्यायमूर्ति सी नगप्पन की एक पीठ ने बिहार की तेजाब हमले की एक पीड़िता के मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
दिल से सर्जन मन से चित्रकार

दिल से सर्जन मन से चित्रकार

करीब 40 साल पहले पंजाब से अमेरिका बस गए सर्जन शिवदेव सिंह ने अपने तैल चित्रों, चारकोल से बनाए गए स्केच और वॉटर कलर्स के जरिये अपनी जड़ों से जुड़ी यादों को तस्वीरों का रूप दे कर पंजाब के ग्रामीण जन-जीवन की झलक दिखाने की कोशिश की है।
भारत में 13 फीसदी लोगों पर मोटापे का खतरा: अध्‍ययन

भारत में 13 फीसदी लोगों पर मोटापे का खतरा: अध्‍ययन

मोटापे को लेकर हुए अपनी तरह के सबसे बड़े सर्वे में सामने आया है कि देश की 1.2 अरब की आबादी में से करीब 13 फीसदी लोग मोटापे से पी‍ड़‍ित हो सकते हैं। यह विडंबना ही है क्योंकि हाल तक देश में कुपोषण एक बड़ी समस्या रहा है लेकिन अब एेसा लगता है कि मोटापा कुपोषण पर हावी होता जा रहा है।
चिकित्सकों की गैरहाजिरी कोई नई बात नहीं

चिकित्सकों की गैरहाजिरी कोई नई बात नहीं

पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहितियां में सुबह के दस बजे पहुंचने पर पता चला कि अस्पताल बंद है। क्योंकि न तो अस्पताल में डाॅक्टर पहुंचे और न ही कंपाउडर। कोई सहायक भी नहीं है जो यह बता पाए कि डाॅक्टर कब आएंगे और अस्पताल कब खुलेगा।
चिकित्सा के क्षेत्र में खामियां

चिकित्सा के क्षेत्र में खामियां

एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका जैसे विकसित देश में हर साल 10 हजार से ज्यादा मरीजों की मौत चिकित्सा त्रुटि के कारण हो रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता का ध्यान रखकर, बेहतर सेवा प्रदान किया जा सकता है। ऐसा नहीं है कि इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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