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राजेंद्र राव की कहानी 'दोपहर का भोजन'

राजेंद्र राव की कहानी 'दोपहर का भोजन'

राजेंद्र राव शिक्षा और पेशे से भले ही इंजीनियर रहे हों, मगर उनका मन सदैव साहित्य और पत्रकारिता में ही रमा रहा । तकनीकी और प्रबंधन के क्षेत्र में काफी समय बिताने के बाद अवसर मिलते ही साहित्यिक पत्रकारिता में आ गए। कृतियों में एक उपन्यास, सात कथा संकलन और कथेतर गद्य के बहुचर्चित संकलन उस रहगुजर की तलाश है । संप्रति दैनिक जागरण में साहित्य संपादक।
पीएफ राशि से सस्ता घर खरीदना भी होगा संभव

पीएफ राशि से सस्ता घर खरीदना भी होगा संभव

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपनी 16 सितंबर को होने वाली बैठक में उस प्रस्ताव पर विचार कर सकता है जिसमें कर्मचारियों को सस्ता घर खरीदने के लिए पीएफ जमाराशि निकालने की सुविधा दी गई है।
शेयर बाजार में अगले हफ्ते से लगेगा भविष्य निधि का पैसा

शेयर बाजार में अगले हफ्ते से लगेगा भविष्य निधि का पैसा

शेयर बाजार में निवेश के लिए 6 अगस्त से कर्मचारी भविष्य निध‌ि संगठन (ईपीएफओ) का धन जारी कर दिया जाएगा। चालू वित्त वर्ष में एक्विटी ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) के जरिये निवेश के लिए तकरीबन 5000 करोड़ रुपये की पहली खेप जारी की जाएगी।
राष्‍ट्रपति के इंटरव्‍यू से बोफोर्स का जिक्र हटवाने की कोशिश

राष्‍ट्रपति के इंटरव्‍यू से बोफोर्स का जिक्र हटवाने की कोशिश

मना करने के बावजूद राष्‍ट्रपति के मुहं से अनायास निकली बात के प्रकाशन को लेकर भारत ने स्‍वीडिश दैनिक से कड़ा विरोध दर्ज कराया है। स्‍वी‍डन में भारतीय राजदूत के जरिए बोफोर्स सौदे से जुड़ी बातों को छपने से रोकने की कोशिश की गई थी, लेकिन अखबार ने इसे नजरअंदाज किया।
कहानी - भेड़िया

कहानी - भेड़िया

दिल्ली में जन्मी योगिता यादव का पहला कहानी संग्रह भारतीय ज्ञानपीठ के आठवें नवलेखन पुरस्कार से सम्मनित किया गया और बाद में वहीं से प्रकाशित हुआ। कहानी झीनी झीनी रे चदरिया को अपने खास शिल्प के कारण आठवें अखिल भारतीय कलमकार कहानी प्रतियोगिता में दि्वतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्हें जम्मू कश्मीर के विशेष सांस्कृतिक अध्ययन के लिए संस्कृति मंत्रालय से जूनियर फैलोशिप मिल चुकी है। वह पिछले 13 सालों से पत्रकारिता में भी सक्रीय हैं। फिलवक्त दैनिक जागरण के जम्मू संस्करण में कार्यरत।
अब क्या होगा कांग्रेस का

अब क्या होगा कांग्रेस का

दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक भी सीट न जीत पाने से राज्य में कांग्रेस के अस्तित्व पर संकट पैदा गया है। लोकसभा चुनाव के बाद लगातार कमजोर होती जा रही कांग्रेस का दिल्ली विधानसभा चुनाव में ऐसा हस्र होगा इस बात का अहसास कांग्रेस नेताओँ को भी नहीं था।
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