भाजपा सरकार आने के बाद पहले जजों की नियुक्ति का कानून बदला गया, फिर आई न्यायपालिका को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नसीहत। इन दोनों बातों ने बरबस चार दशक पहले के भारतीय इतिहास के घाव हरे कर दिए।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को केंद्र सरकार और यूपी की अखिलेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार लगातार जन विरोधी कार्य कर रही है और इसी का नतीजा है कि वह धीरे-धीरे अपनी लोकप्रियता खोती जा रही है।
गुड फ्राइडे से शुरू होकर ईस्टर तक चले भारत के शीर्ष न्यायाधीशों के तीन दिवसीय सम्मेलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश कुरियन जोसफ द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र ने कई सवालों को जन्म दिया है।
न्यायपालिका को धारणा आधारित फैसले देने से बचने की सलाह देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि यहां स्व मूल्यांकन का आंतरिक तंत्र होना चाहिए क्योंकि न्यायाधीशों को पवित्र माना जाता है और राजनीतिक वर्ग की तरह उसे शायद ही आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने एकाउंटिंग मानक नियमों के उल्लंघन के लिए गुजरात सरकार की आलोचना की है और कहा है कि उसने 2013-14 के दौरान राजस्व अधिशेष को बढा-चढाकर पेश करने के लिए एकाउंटिंग मानक नियमों का उल्लंघन किया। 2013-2014 में प्रधानंमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी की भीतरी खींचतान पर उसे आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जन लोकपाल के नारे पर सत्ता में आने वाली और अपने आंतरिक लोकतंत्र का ढिंढोरा पीटने वाली पार्टी ने अपने ही लोकपाल को और अन्य कुछ चुनिंदा नेताओं को हटा दिया।
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का एजेंडा कांग्रेस मुक्त भारत है। पार्टी ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में इस बात को जोर-शोर से रखा है कि कांग्रेसमुक्त भारत ही भाजपा का एजेंडा है।
केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के अंदर बदलते समीकरणों की झलक यहां पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में देखने को मिली जहां अलग-थलग पड़े वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का मार्गदर्शन संबोधन इस बार नहीं हुआ जबकि आम तौर पर ऐसी बैठकों के अंत में उनके संबोधन से होता रहा है।
भूमि अधिग्रहण विधेयक पर विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विपक्षी दलों पर झूठ फैलाकर राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया और कहा कि वह किसानों के हितों का संरक्षण करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की समय सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले सरकार ने इसे फिर से जारी कर दिया। इस अध्यादेश के बदले संबंधित विधेयक को राज्यसभा में विपक्ष के कड़े प्रतिरोध के कारण पारित नहीं करा पाने के कारण सरकार ने अध्यादेश को फिर से जारी किया।