मुद्रास्फीति और वित्तीय घाटा नियंत्रण में रहने के मद्देनजर बैंकरों और उद्योगपतियों को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक मंगलवार को होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने और निवेश बढ़ाने के लिए रेपो दर में कटौती कर सकता है।
सोशल मीडिया का इस्तेमाल किस प्रकार अफवाहें फैलाने के लिए किया जाता है यह हम अतीत में देख चुके हैं मगर अब मुख्यधारा का मीडिया भी इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त हो जाए तो लोगों को और अधिक सावधान रहने की जरूरत है।
बाजारवादी ताकतों के मोदी सरकार से लगातार हो रहे मोहभंग की स्थिति के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि लोगों ने मोदी सरकार से अवास्तविक उम्मीदें लगा ली थीं।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को नीतिगत ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया। वह देखना चाहते हैं कि खाद्य मुद्रास्फीति पर हाल की बेमौसम बारिश का क्या असर रहता है। साथ ही वह यह भी चाहते हैं कि रेपो दर में पिछली कटौतियों का फायदा बैंक उपभोक्ताओं को दें।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन द्वारा ब्याज दरों में कटौती का फायदा उपभोक्ताओं को न देने के लिए बैंकों की आलोचना किए जाने के बाद मंगलवार को देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने ऋण पर ब्याज दर में 0.15 प्रतिशत कटौती की घोषणा कर दी। एसबीआई द्वारा यह कदम उठाए जाने के कुछ ही देर बाद निजी क्षेत्र के दो बड़े बैंकों आईसीआईसीआई और एचडीएफसी ने अपने दरों में कटौती कर दी। एचडीएफसी ने जहां एसबीआई के बराबर .15 फीसदी की कटौती की वहीं आईसीआईसी बैंक ने आधार दर में .25 फीसदी की कमी की। अब एचडीएफसी बैंक की आधार दर 9.85 फीसदी हो जाएगी वहीं आईसीआईसीआई बैंक की आधार दर 9.75 फीसदी रहेगी।
पिछले कुछ समय से मीडिया में ऐसी खबरें चल रही थीं कि रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन और केंद्र सरकार के बीच सबकुछ ठीक नहीं है और सरकार नीतिगत दरों में अपेक्षा अनुरूप कटौती नहीं होने के कारण राजन से नाराज है जबकि राजन रिजर्व बैंक की स्वायत्ता में सरकार के हस्तक्षेप के कारण खिन्न हैं।
सरकार और रिजर्व बैंक के बीच महंगाई को नियंत्रण में रखने के समझौते और इसकी जिम्मेदारी रिजर्व बैंक को सौँपे जाने के एक पखवाड़े के अंद भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को मुख्य ब्याज दर (रेपो रेट) 0.25 प्रतिशत घटाकर 7.5 प्रतिशत कर बाजार को चौंका दिया।
ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार रिजर्व बैंक की स्वायत्ता में दखल देने की ओर बढ़ रही है। हाल में वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के बीच हुए एक समझौते को देखकर तो ऐसा ही लगता है। इस दखल को प्रभावी बनाने के लिए रिजर्व बैंक कानून में संशोधन तक किया जाना है।
डांडेली टाइगर रिजर्व के प्रवेश स्थल पर जब मैं पहुंचा तो वहां मेरे और मेरी गाड़ी के ड्राइवर के अलावा और कोई न था। न कोई चौकीदार और न ही कोई अन्य सरकारी अमलेदार। दूसरे सैलानियों के पहुंचने से पहले जंगल में अलसुबह घुसकर जानवरों को देखने की चाह में मैं शायद कुछ ज्यादा ही जल्दी पहुंच गया था।