पंडित जवाहरलाल नेहरू की विरासत को भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में संभालने वाले लाल बहादुर शास्त्री के निधन को 51 साल हो गए हैं, पर उनके परिवार के कुछ सदस्यों को आज भी संदेह है कि उनकी मृत्यु प्राकृतिक नहीं थी। ऐसे में शास्त्री जी के परिजनों को उनके साथ गए सहयोगियों द्वारा ताशकंद समझौते के विवरणात्मक तथ्यों को एक बार अवश्य देख लेने की आवश्यकता है।
तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन से जुड़ी परिस्थितियों पर मद्रास उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के संशय प्रकट करने के एक दिन बाद द्रमुक ने उनके निधन की परिस्थितियों की उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश द्वारा जांच कराये जाने की आज मांग की।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में रुपये निकालने के लिये बैंक के आगे कतार में खड़े एक बुजुर्ग की ग़श खाकर गिरने से मृत्यु हो गयी। नोटबंदी के करीब 48 दिनों बाद भी देश में हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। बैंकों और एटीएम के बाहर लगी कतारेंं इसकी गवाही दे रही हैं।
बंगाल के मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज में आग लगने के बाद मची भगदड़ में दो लोगों की मृत्यु होने की खबर है। कम से कम दो दर्जन लोग चोटिल हो गए हैं। अस्पताल के फीमेल वार्ड में बतौर आया कार्यरत मामनी दास और पूर्णिमा दास की भगदड़ में मौत हो गई। अस्पताल में भर्ती बीमारों के कई परिजन आहत हुए हैं। कई नवजात अस्पताल में फंसे हुए हैं।
मध्य प्रदेश में 50 दलित परिवारों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से इच्छा मृत्यु के लिए अनुमति मांगी है। उनका आरोप है कि 15 साल पहले सरकार द्वारा उन्हें आबंटित की गई जमीन पर बाहुबली लोगों ने कब्जा कर रखा है, जिससे उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं बचा है।
सर्वोच्च न्यायालय ने आज शबनम और उसके प्रेमी को दी गई फांसी की सजा पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही एक बार फिर मृत्य दंड पर बहस तेज हो गई है। इस बहस में में एशियन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स की नई रिपोर्ट –भारतः अंतःकरण के नाम पर मौत (इंडियाः डेथ इन द नेम ऑफ कॉन्सिएंस) ने नई रोशनी डाली है। इस रिपोर्ट ने समाज के विवेक या अंतःकरण के नाम पर दिए गए मृत्यु दंड के पीछे के विरोधाभास, कानूनी मानदंड़ों के ह्रास को बेबाकी से सामने रखा है।