केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज यह दावा कर राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया कि जेएनयू में पिछले दिनों संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के विरोध में हुए कार्यक्रम को आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद का समर्थन मिला था। राजनाथ के बयान के तुरंत बाद विपक्षी पार्टियों ने मांग की कि गृह मंत्री जेएनयू परिसर में हुए कार्यक्रम को लेकर किए गए अपने दावे को साबित करने के लिए सबूत दें।
पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक ने 2008 मुंबई हमलों के मामले में डेविड हेडली की गवाही को झूठ का पुलिंदा बताते हुए भारत पर आरोप लगाया है कि वह हेडली के गढ़े हुए इकबालिया बयान से पाकिस्तान को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।
आम आदमी पार्टी से निकाले गए योगेन्द्र यादव एक नई पार्टी बनाना चाहते हैं। आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि लोगों ने आप को मंदिर समझा था लेकिन वह मूर्तियों की एक दुकान भर निकली। उन्होंने एक ऐसी पार्टी का गठन करने की इच्छा जताई जो आतंरिक लोकतंत्र, पारदर्शिता, जवाबदेही के मानकों पर खरा उतरकर देश भर में उर्जा का संचार करे।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव थोराट ने दूसरे वर्गों के मुकाबले दलितों और मुसलमानों के शिक्षा, रोजगार एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व में पिछड़े होने का दावा करते हुए शनिवार को कहा कि इस पिछड़ेपन की सबसे बड़ी वजह इन दोनों समुदायों के साथ होने वाला कथित भेदभाव है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में रोजगार गारंटी कानून मनरेगा की प्रशंसा करने को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी पर चुटकी ली है। मंगलवार को राहुल ने कहा कि मोदीजी की सरकार द्वारा संप्रग सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा की सराहना करना उनकी राजनीतिक बुद्धिमता का जीता जागता उदाहरण है।
आम आदमी पार्टी से निलंबित नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण एक नए राजनीतिक दल के गठन पर विचार कर रहे हैं और वे 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतार सकते हैं। आप से निलंबन के बाद इन दोनों नेताओं और समर्थकों द्वारा शुरू किए गए स्वराज अभियान ने कहा है कि वे लोग पंजाब में चुनाव लड़ने को लेकर गंभीरता से सोच रहे हैं।
देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपति एसके सोपोरी का कहना है कि जेएनयू को अक्सर राजनीतिक सक्रियता के मंच के रूप में देखा जाता है और अकादमिक क्षेत्र में इसके योगदान को नजरंदाज किया जाता है।
उच्चतम न्यायालय ने अरुणाचल प्रदेश में चल रहे राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में गुवाहाटी उच्च न्यायालय के कुछ आदेशों से संबंधित याचिकाओं को आज संविधान पीठ को सौंप दिया। न्यायमूर्ति जे.एस. खेहड़ और न्यायमूर्ति सी. नागप्पन की पीठ ने कहा कि यह मामला राज्यपाल, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के अधिकारों के सांविधानिक प्रावधानों से संबंधित है। इसलिए इस पर वृहद पीठ द्वारा विचार की आवश्यकता है।