गूगल मैप पर एंटी नेशनल, सिडिशन, पैट्रियोटिज्म और भारत माता की जय जैसे शब्द सर्च करने पर यूजर को जेएनयू की तरफ निर्देशित किया जाता है जहां के छात्र देशद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पिछले एक महीने में दूसरी बार इलाहाबाद पहुंची हैं। इस दौरान वह आनंद भवन में रही। कांग्रेस अध्यक्ष के अचानक इस दौरे को लेकर लोगों में सुगबुगाहट है कि आखिर इतनी जल्दी-जल्दी आनंद भवन का दौरा क्यों लग रहा है।
संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित देश के महिला जनप्रतिनिधियों का दो दिवसीय सम्मेलन आज समाप्त हो गया। समापन समारोह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह कहना कि पुरुष महिलाओं को सशक्त कर सकते हैं हास्यास्पद है।
राज्यसभा में बुधवार को दूसरे दिन भी भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व वित्त मंत्री के बेटे कार्ति चिदंबरम से जुड़े भ्रष्टाचार मामले पर जबर्दस्त हंगामा किया। इसके जवाब में राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद प्रमोद तिवारी ने गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल की बेटी अनार पटेल को सस्ती दर पर जमीन देने का मुद्दा सदन में उठाया। वहीं संसद के दोनों सदनों में इशरत का मुद्दा गरमाया रहा।
मंगलवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हिंसा पीड़ितों से मिलने पहुंचे तो उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। लोगों ने सीएम मुर्दाबाद और वापस जाओ के नारे लगाए। उन्हें काले झंडे भी दिखाए। हालात इतने खराब हो गए की खट्टर को बिना भाषण दिए ही लौटना पड़ा। गौरतलब है कि हरियाणा में आरक्षण की मांग को लेकर बीते 9 दिनों से जाट समुदाय आंदोलन पर हैं।
हरियाणा के हिसार, हांसी और भिवानी शहरों में आज भी कर्फ्यू लगा हुआ है जबकि जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से सर्वाधिक प्रभावित रोहतक जिले में कर्फ्यू में चार घंटे की ढील दी गई। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रोहतक का दौरा किया जहां हिंसक स्थिति को रोकने में पुलिस की विफलता के विरोध में गुस्साए लोगों ने उनका घेराव किया।
सिंहासन के लिए महाभारत और रामायण युग के षडयंत्रों की कहानियां भारत के गौरवशाली इतिहास के साथ सुनाई-पढ़ाई जाती रही हैं। इसलिए अरविंद केजरीवाल और नरेंद्र मोदी को षडयंत्रों की सूचनाओं पर क्या अधिक चिंतित होकर जनता के दरबार में गुहार लगानी चाहिए?
हरियाणा में आरक्षण के लिए आंदोलनरत जाटों ने आज भी कई जगहों पर हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया। भीड़ ने ताजा घटनाक्रम में सुरक्षाकर्मियों पर पथराव करने के साथ ही कई सरकारी वाहनों में आग लगा दी। आंदोलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर अब 16 तक पहुंच गई है।
विरोध, प्रदर्शन, आंदोलन, लोकतंत्र में अनुचित नहीं माने जाते। लेकिन अपने खेत-खलिहान-घर-आंगन को सुरक्षित रखने के साथ मासूम बच्चों के स्कूलों, बीमार और घायलों का उपचार करने वाले अस्पतालों, गांव से कस्बों तक पहंुचाने वाली बसों अथवा जानमाल की सुरक्षा के लिए बनाए गए थानों को आग लगाने के बजाय सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी तो समाज की है।