स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद स्वयं को स्वतंत्र मान लेने वाली 562 रियासतों का एकीकरण करके सरदार बल्लभाई पटेल ने जो उपलब्धि हासिल की थी वह वैश्विक इतिहास में ऐसी अद्वितीय घटना है जिसके समक्ष बिस्मार्क भी बौने साबित होंगे। यह टिप्पणी सरदार पटेल पर लिखी एक पुस्तक में की गई है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 16 अक्टूबर को युवा कथाकार पंकज सुबीर के बहुचर्चित उपन्यास अकाल में उत्सव पर केंद्रित एक पुस्तक चर्चा का आयोजन किया गया है।
दिल्ली के उपहार सिनेमा हादसे के 59 पीड़ितों में से दो के माता-पिता ने इस सदमे तथा न्याय के लिए अपनी लंबी लड़ाई पर एक किताब लिखी है। ट्रायल बाय फायर का प्रकाशन पेंगुइन रेंडम हाउस इंडिया ने किया है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी की पुस्तक सिटीजन एंड सोसायटी का विमोचन किया। किताब में अंसारी ने देश में विभिन्न थीमों पर दिए गए अपने लेक्चरों को शामिल किया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि वह कई किताबों को भेंट स्वरुप पाते हैं। लेकिन यह पुस्तक उनके लिए विशेष तौर पर खास है क्योंकि इसको महान भारत के उप राष्ट्रपति मोहम्मद अंसारी ने लिखी है, जो एक प्रबुद़ध विद़वान और सचेत नागरिक के रुप में समूचे देश में शुमार हैं।
बहुप्रतीक्षित पुस्तक मेला इस बार 7 जनवरी 2017 से 15 जनवरी 2017 तक प्रगति मैदान में होगा। विश्व पुस्तक मेले का लोग पूरे साल इंतजार करते हैं। किताबों के सालाना जश्न के लिए राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
देश के नए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने स्मृति ईरानी के फैसले को पलटते हुए नई दिल्ली इंटरनैशनल बुक फेयर के आयोजन को आउटसोर्स करने से इनकार कर दिया है। तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री ईरानी ने इसे आउटसोर्स करने का फैसला किया था। तब मंत्रालय ने नैशनल बुक ट्रस्ट से एक प्राइवेट एजेंसी को प्रेजेंटेशन देने को भी कहा था।
दिल्ली पुस्तक मेले में इस बार किताबों के साथ तरह-तरह की स्टेशनरी भी लोगों को आकर्षित कर रही है। पुस्तक प्रेमी अपनी मनपंसद किताबें खरीदने के साथ-साथ नए तरह की स्टेशनरी को भी खोज कर ले जा रहे हैं।
युवा पीढ़ी में पढ़ने की आदत विकसित करने के लक्ष्य के साथ शनिवार को 22वें दिल्ली पुस्तक मेले का शुभारंभ हुआ। दिल्ली के प्रगति मैदान में केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने दिल्ली पुस्तक मेला के 22वें संस्करण का उद्घाटन किया।
कहते हैं औरत का मन कोई नहीं जान सकता। उसके दिल के जज्बातों को जब तक वह खुद अपनी जुबान से न कहे, अंदाजा लगाना मुश्किल है। इसके उलट, औरत सहजता से इस बात का अंदाजा लगा लेती है कि उसके सामने आए शख्स के दिल में उसको लेकर क्या चल रहा है और पाया भी यही जाता है कि ज्यादातर मामलों में औरत का अनुमान एक दम सही और सटीक होता है।