सपनों की उम्र लघुकथा संग्रह। मीडिया का अंतर्पक्ष, संपादित पुस्तक। कहानी संग्रह दीनानाथ की चक्की शीघ्र प्रकाश्य। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से प्रकाशित पत्रिका बहुवचन के संपादक।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पत्रकारों ने जमकर सेल्फी ली वहीं प्रधानमंत्री पत्रकारों के उत्साह से खुश नजर आ रहे थे।
बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद अब भाजपा में विरोध के स्वर लगातार उभर रहे हैं। भाजपा सांसद भोला सिंह ने अपनी ही पार्टी पर मंगलवार को आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा बिहार में केवल हारी नहीं है, बल्कि घुटने तक पानी में डूब गई है।
बिहार चुनाव के नतीजों पर विचार विमर्श करने के लिए आज हुई भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद भाजपा ने बिहार में हार के लिए किसी भी नेता को जिम्मेदार ठहराने की बात को खारिज करते हुए इस आलोचना को भी नकार दिया कि संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण की समीक्षा संबंधी बयान ने हार में एक बड़ी भूमिका अदा की।
चुुनाव अपने यहां सचमुच उत्सव हैं। चुनाव लडऩे-लड़ाने वालों को छोडक़र सभी इसको इंज्वॉय करते हैं। और बिहार चुनाव तो उत्सवों के समय ही होते रहे। दशहरा, दीपावली- सबको निबटाते हुए चुनाव में भागीदारी का अलग ही आनंद है। बिहार का आदमी थोड़ा हटकर भी होता है। वह अमेरिकी चुनाव को लेकर भी अंदर की खबरें जानता-समझता है। इस मामले में भुच्च बिहारी भी इंटरनेशनल है। इसलिए कोई यह कैसे सोच सकता है कि अपने घर में हो रहे चुनाव के अंदर की खबरें उसके पास नहीं होंगी।
बिहार चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी की अध्यक्ष अमित शाह की पत्नी सोनल शाह के पटना पहुंचने को लेकर सियासी हलके में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि सूत्र बता रहे हैं कि अमित शाह के बिहार में लंबे प्रवास के कारण उनकी पत्नी पटना पहुंची है।
पटना हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही यात्रियों का इंतजार कर रहे टैक्सी, ऑटो रिक्शा वालों ने पूछा कि कहां चलना है। कुछ न बोलते हुए जब आगे बढ़ा तो एक रिक्शा वाला मिला और बोला कहां चलना है साहब, मैंने कहा बोरिंग रोड। बोला छोड़ दूंगा। खैर मुझे बोरिंग रोड तो जाना नहीं था लेकिन मैंने सोचा रिक्शा से चलते कुछ चुनावी माहौल का जायजा लिया जाए। छपरा का रहने वाला रिक्शा चालक कमलेश से जब पूछा कि बिहार में चुनाव है और कहीं कोई शोर नहीं हो रहा कही कोई बड़े-बड़े पोस्टर नहीं दिखाई पड़ रहा है। कमलेश बोला कि साहब यह एयरपोर्ट का इलाका है जब आप शहर में जाएंगे तो हालात बदले हुए नजर आएंगे। खैर कमलेश ने बताया कि साहब किसी की लहर नहीं है कौन चुनाव जीतेगा कह पाना मुश्किल है। मैंने पूछा क्यों, कमलेश कहता है कि विकास का जो मुद्दा भारतीय जनता पार्टी का है तो वही मुद्दा तो नीतीश कुमार का रहा है। आज बिहार में जो विकास हुआ है वह नीतीश कुमार की ही बदौलत हुआ है।
बिहार विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की नजर है। चुनाव परिणाम जो भी हो लेकिन सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। मुख्य मुकाबला भाजपानीत राजग और महागठबंधन (जदयू, राजद, कांग्रेस) के बीच है। लोकसभा चुनाव के बाद राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में जीत की लय (दिल्ली को छोडक़र) बरकरार रखने के लिए भाजपा कड़ी मेहनत कर रही है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह आश्वत हैं कि इस चुनाव में भी जीत निश्चित है। शाह के व्यस्त कार्यक्रमों के बीच आउटलुक के विशेष संवाददाता ने पटना में विस्तार से बात की। पेश है प्रमुख अंश-
बिहार विधानसभा चुनाव में गोमांस का मुद्दा उछालकर और जातीय आधार पर माहौल को अपने पक्ष में करने की हो रही कोशिशों पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण के परिजन बेहद दुखी हैं और वह कल लोकनायक की जयंती पर आयोजित होने वाले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कार्यक्रम में शिरकत नहीं करेंगे।
हिंदी के मशहूर यारबाश कवि वीरेन डंगवाल हमारे बीच नहीं रहे। आउटलुक ने अगस्त, 2013 में दिल्ली में उनसे लंबी बातचीत का समां बांधा था। इसमें पुरानी मिठास की चाशनी के साथ सिरों को जोड़ने का जिम्मा उठाया था उनके पुराने दिनों के साथी, वरिष्ठ कवि मंगलेश डबराल ने। आज हम सब जब वीरेन डंगवाल के जाने से बेहद दुखी है, उन्हें शिद्दत से याद करने का सिलसिला जारी है। हम उनसे हुई इस महत्वपूर्ण बातचीत फिर से साझा कर रहे हैं। कैंसर से जूझ रहे इस जिंदादिल कवि ने कितने गहरे सरोकारों की पोटली, जीवन दर्शन, 70 के दशक की बेचैनी, युवा पीढ़ी की सृजनशीलता...और भी बहुत कुछ जो जरूरी और बिसरा हुआ है, सबको पूरे अपनी संवेदना के साथ रखा था। इस संवाद से फिर-फिर गुजरकर, हाथ कुछ मोती ही लगेंगे---भाषा