हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रसासन की कथित प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने वाले दलित शोध छात्र रोहित वेमुला के भाई ने दिल्ली सरकार की तरफ से की गई नौकरी की पेशकश को स्वीकारने से मना कर दिया है। यह जानकारी दिल्ली की आप सरकार ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में दी है।
अमेरिका में मुस्लिमों का प्रवेश अस्थायी तौर पर प्रतिबंधित करने की बात कह चारों ओर से आलोचना का सामना करने वाले डोनाल्ड ट्रंप अब अपने कट्टर रूख में कुछ नरमी लाते दिखाई पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि उनका बयान समस्या को निपटा लिए जाने तक के लिए महज एक सुझाव ही था।
इराक की राजधानी बगदाद के निकट सद्र शहर में एक कार बम विस्फोट में 34 लोगों के मारे जाने की खबर है। यह विस्फोट शहर के व्यस्त बाजार में हुआ। इस धमाके में कई लोग बुरी तरह घायल हुए हैं।
सह शिक्षा के इस्लामिक सिद्धांतों के अनुकूल ना होने की बात कहते हुए पाकिस्तान के एक धार्मिक संगठन ने सरकार से जल्द से जल्द पुरुषों एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग शिक्षा तंत्र स्थापित करने को कहा है।
पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत 30 करोड़ वर्ष पहले नहीं बल्कि कम-से-कम 4.1 अरब वर्ष पहले हुई थी। पूर्व के दस्तावेजों के अनुसार, हमारे ग्रह पर 30 करोड़ वर्ष पहले जीवन की शुरुआत होने की बात कही गई थी लेकिन नये अनुसंधान में नए तथ्य सामने आए हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाषण से एक दिन पहले पाकिस्तान ने फिर कश्मीर का राग गाया है। उसने भारत पर संघर्षविराम का उल्लंघन करने, जम्मू-कश्मीर में दिखावटी चुनाव कराने का आरोप लगाया, वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वार्ता रद्द होने की जिम्मेदारी भी भारत पर डाली।
एक भारतीय लड़की के आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने की खबर ने खुफिया एजेंसियों समेत लोगों को हैरत और चिंता में डाल दिया है। लड़की सेना के एक सेवानिवृत्त आलाधिकारी की बेटी बताई जा रही है।
वैज्ञानिकों ने ऐसे प्रोटीन की पहचान की है जो दिल का दौरा पड़ने के बाद उसकी मांसपेशी की कोशिकाओं को फिर से बनाने में मदद करता है। अनुसंधाकर्ताओं ने यह भी बताया है कि हृदय के अंदर थोड़ी अधिक मात्रा में यह प्रोटीन रखा जाए तो चूहों और सुअरों में इससे न केवल हृदयघात के बाद दिल के कामकाज में सुधार होता है बल्कि उनके बचने की संभावना भी बढ़ जाती है।
कुपोषण एक ऐसी बीमारी जो कि बच्चों के विकास में बाधक ही नहीं बल्कि समाज के लिए चिंता का विषय है। कुपोषण से मुक्ति की सरकार लाख कोशिशें कर ले लेकिन इससे मुक्ति एक सपना बन गया है। राष्ट्रीय प्रतिष्ठान और सेव द चिल्ड्रेन के लिए किए जा रहे शोध के दौरान पाया गया कि सरकारी आंकड़े कुपोषण को लेकर कुछ और स्थिति बताते हैं जबकि जमीनी हकीकत कुछ और होती है।