पशु बाजार संबंधित केन्द्र के फैसले को लेकर विवाद जारी है। इस बीच आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर ने गौहत्या पर लगाई गई पाबंदी पर केंद्र सरकार का समर्थन किया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आज उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने यह नोटिस इटावा जिले के अस्पताल से एंबुलेंस न मिलने पर अपने किशोर बेटे का शव कंधे पर ले जाने को मजबूर हुए एक मजदूर का मामला सामने आने पर दिया है।
भारत के दो जवानों को मारने के बाद उनके शवों के साथ की गई बर्बरता से पूरा देश आक्रोशित है। सेना ने इसका बदला लेते हुए पाक की दो चौकियों और 10 सैनिकों को मार गिराया है। लेकिन पाक हमले में शहीद हुए बीएसएफ हेड कांस्टेबल प्रेम सागर की बेटी ने अपने पिता की शहादत के बदले सरकार से 50 पाक सैनिकों के सिर मांगे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का आलम आज भी जस की तस है जबकि उत्तर प्रदेश की सत्ता अखिलेश सरकार से होकर योगी आदित्यनाथ के पास पहुंच चुकी है। इस दौरान सरकार बदलाव के तमाम बड़े दावे करे, लेकिन एक आम आदमी के द्वारा शव को अपने कंधे पर उठाकर ले जाना सभी दावों को ढेर करता दिख रहा है।
उत्तर प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट ने अपने बेटे को मुसलमानों से भेदभाव नहीं करने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि बुर्का पहने मुस्लिम महिलाओं ने भी योगी को वोट दिया है इसलिए योगी को उनका ध्यान रखना चाहिए और उनको सभी धर्म के लोगों का दिल जीतना चाहिए।
भाजपा ने आज गोवा में भाजपा के सरकार बनाने की तैयारी को लोकतंत्र की हत्या बताने के कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर दोष मढ़ने की बजाय आत्मचिंतन करना चाहिए क्योंकि जिसके पास बहुमत होगा, उसे ही सरकार बनाने का न्यौता मिलेगा।
मेरा बेटा 26 दुश्मनों को मारने के बाद शहीद हुआ था। जब यह घटना घटी उस वक्त केंद्र में सरकार भाजपा की थी। उस दौरान हमसे कई तरह के वादे किए गए थे जो पूरे नहीं हुए और आज जब मेरी पोती गुरमेहर को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है तब भी सरकार भाजपा की है। यह दर्द है रामजस विवाद में चर्चा आई गुरमेहर कौर के दादा कंवलजीत सिंह का।
जर्मनी की राजधानी बर्लिन के भीड़भाड़ वाले क्रिसमस बाजार में एक पाकिस्तानी युवक ने ट्रक चढ़ा दिया जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और करीब 50 लोग घायल हो गये। यह हमलावर जर्मनी में शरण मांगने के लिए आया था।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी बेटे को अपने माता पिता के खुद की अर्जित किये गये घर में रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और वह केवल उनकी दया पर ही वहां रह सकता है, फिर चाहे बेटा विवाहित हो या अविवाहित।