गुरुग्राम में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। तीन लोगों ने एक महिला के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया और महिला की 9 महीने की बच्ची को ऑटो के बाहर फेंक दिया।
एक ओर जहां देश में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और बलात्कार जैसी घटनाएं दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। वहीं, दूसरी ओर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ(आरएसएस) के नेता इंद्रेश कुमार इन घटनाओं पर विवादित बयान देकर एक फिर चर्चा में आ गए हैं। उनका कहना है कि देश में पश्चिमी संस्कृति की वजह से बलात्कार और तीन तलाक जैसी घटनाएं होती हैं।
उत्तर प्रदेश में सरेराह बढ़ रही बलात्कार,छेड़छाड़ की घटना अब सड़क से होकर ट्रेन तक पहुंच गई है। लखनऊ से चंडीगढ़ जा रही एक ट्रेन में बलात्कार की घटना सामने आई है। एक जीआरपी के जवान द्वारा कथित रेप को अंजाम दिया गया।
दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर लूट और हत्या का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक अपराधियों ने एक परिवार से लूटपाट की है। लूटपाट का विरोध करने पर एक व्यक्ति की हत्या भी कर दी गई।
देश में आए दिन महिलाओं पर होने वाले यौन अपराधों का मामला सामने आता रहता है। शायद ही कोई ऐसा दिन होगा, जब इस तरह की कोई खबर पढ़ने और सुनने को न मिले। एक ऐसा ही मामला केरल में भी सामने आया जहां, महिला ने आत्मरक्षा के लिए बलात्कार करने वाले उस शख्स। के जननांगों को ही काट दिया।
हरियाणा के रोहतक से निर्भया जैसी दर्दनाक घटना सामने आई है। सोनीपत की 23 वर्षीय युवती का अपहरण कर उसके साथ गैंगरेप किया और बर्बरता की सारी हदें पार कर दी गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने आज निर्भया मामले में चार दोषियों की अपील पर हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए फांसी की सजा को बरकरार रखी है। फैसले के दौरान निर्भया के माता-पिता भी कोर्ट में मौजूद थे।
निर्भया बलात्कार और हत्या मामले में मौत की सजा पाने वाले दोषियों के वकीलों ने शुक्रवार को कहा कि जनता के दबाव में आकर ही उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकार रखा है।
दिल्ली के एक स्कूल द्वारा एक रेप पीड़ित छात्रा को एडमिशन नहीं देने का मामला सामने आया है। छात्रा के परिजनों ने स्कूल पर आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को प्रवेश देने से स्कूल ने इंकार कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा है कि बलात्कारियों को पहले जमकर पीटना चाहिए बाद में उनके घावों पर नमक और मिर्च रगड़ना चाहिए। बलात्कारियों पर एक आम आदमी अगर इस तरह की कठोर प्रतिक्रिया देता तो आवेशवश इसे एक हद तक सही समझा जा सकता था पर ऊंचे संवैधानिक पद पर बैठे एक मंत्री का ऐसा बयान देश के कानून पर सवारी कर रहा है।