पेप्सीको की सीईओ तथा चेयरमैन इंदिरा नूयी को फारच्युन की 51 सर्वाधिक शक्तिशाली महिला की सूची में जगह मिली है। वह इस सूची में एकमात्र भारतीय मूल की महिला हैं। इसमें जनरल मोटर्स की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) तथा चेयरमैन मैरी बारा पहले पायदान पर हैं। नूयी सूची में दूसरे स्थान पर हैं।
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक लापरवाही का एक अजीब मामला सामने आया है। राज्य की बीपीएल सूची में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का नाम दर्ज है। इस संबंध में खुद दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर अपने खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है।
दुनिया की बड़ी कंपनियों की फॉर्च्यून 500 सूची में सात भारतीय कंपनियां जगह पाने में कामयाब रही हैं। इनमें इंडियन ऑयल कार्पोरेशन का स्थान सबसे ऊपर रहा है, जबकि ओएनजीसी सूची में स्थान बनाने में नाकाम रही।
फोर्ब्स की दानदाताओं की सूची में चीन के पॉनी मा अव्वल हैं। वह टेनसेंट होल्डिंग के सीईओ हैं और उन्होंने टेनसेंट फाउंडेशन को 15 हजार करोड़ रुपये दान किए हैं।
जस्ट डायल, यूटीआआई एसेट मैनजमेंट कंपनी तथा आईआरसीटीसी भारतीय कंपनियों की फॉर्चून नेक्स्ट 500 सूची में शामिल हैं। सूची में डायनामैटिक टेक्नोलाजीज शीर्ष स्थान पर है।
आलोक कुमार और जितेन्द्र कुमार को नीति आयोग में पांच साल के लिए सलाहकार नियुक्त किया गया है। ये नियुक्तियां शनिवार से प्रभावी हो गई हैं। आलोक उत्तर प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जबकि जितेंद्र उत्तराखंड कैडर के 1987 बैच के भारतीय वन सेवा के अधिकारी हैं।
संविधान का अनुच्छेद 124 मूल रूप से यह कहता है, 'सुप्रीम कोर्ट के हर जज की नियुक्ति राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के संबंधित जजों से सलाह-मशविरे से करेंगें जिसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) से हमेशा सलाह ली जाएगी। जजों की नियुक्ति एवं तबादले में किसकी चलेगी इसे लेकर न्यायपालिका और कार्यपालिका में 1980 के दशक से ही जोर-आजमाइश चल रही है।
बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय खंड पीठ के सामने जिस तरह सरकार और पीठ के बीच तीखे शब्दों का आदान-प्रदान हुआ, उसे देखते हुए अब तक फुसफुसाए जा रहे कुछ सवाल थोड़ा ज्यादा जोर से सुनाई पडऩे लग गए हैं। क्या कार्यपालिका और न्यायपालिका एक बड़े टकराव की ओर बढ़ रही हैं? क्या संसद ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) विधेयक पारित करने में हड़बड़ी दिखाई ?
उच्चतम न्यायालय ने अधिवक्ता एम.एल. शर्मा को उच्च न्यायपालिका के लिए जजों की नियुक्ति संबंधी नए कानून को चुनौती देती उनकी जनहित याचिका में गैर जिम्मेदार और अपमानजनक आरोप लगाने पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि यह राजनीतिक मंच नहीं है।