इस साल के अंत में होने जा रहे गुजरात विधानसभा के चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में नामांकन हासिल करने के लिए लॉबिंग शुरू हो गई है।
अमेरिका वित्त वर्ष 2017-18 के लिए आगामी 3 अप्रैल से एच-1बी कार्य वीजा के लिए आवेदन शुरू करेगा। हालांकि, इस वीजा कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भारतीय आईटी कंपनियों तथा पेशेवरों में यह वीजा काफी लोकप्रिय है।
केंद्र के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने में कभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली माकपा अपनी कमजोर पड़ती ताकत के साथ अब अपने पूर्व के बड़े कद की छाया मात्र रह गयी है और असहाय होकर भाजपा के खिलाफ अपनी भूमिका तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के हाथों में जाते देख रही है।
सरकार कॉल ड्रॉप पर दूरसंचार उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया जानने के लिये टॉल फ्री नंबर 1955 शुरू करने की योजना बना रही है। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, कॉल ड्रॉप पर आईवीआरएस सिस्टम के लिये शार्ट कोड 1955 आवंटित किया गया है।
रियो ओलंपिक में शानदार शुरुआत करते हुए भारतीय पुरूष हॉकी टीम ने अपने पहले मैच में आयरलैंड को एक कड़े मुकाबले में 3-2 से हरा दिया। रूपिंदर पाल सिंह की अगुआई में ड्रैग फ्लिकरों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने यह जीत दर्ज की।
टाइम्स नाउ में मंगलवार को प्रसारित हुए अर्नब गोस्वामी के शो में कश्मीर पर वार्ता में पाकिस्तान को शामिल करने का समर्थन करने को लेकर परिचर्चा की गई। इस शो में संपादक अर्नब गोस्वामी के मीडिया के प्रति नकारात्मक रवैये को लेकर एनडीटीवी की बरखा दत्त ने उन पर हमला बोला है।
अभी टाइम्स नाऊ के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी द्वारा लिए गए पीएम मोदी के इंटरव्यू पर बहस समाप्त ही नहीं हुई थी कि पीएम माेदी के एक और इंटरव्यू की चर्चा सोशल मीडिया में चर्चा का केंद्र बन गई है। यूएई में रहने वाले एक जर्नलिस्ट ने मोदी का इंटरव्यू लेने का अनुभव फेसबुक पर शेयर किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि पीएम मोदी इंटरव्यू से पहले सवाल अपने पास मंगाते हैं।
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पहली बार भारतीय मीडिया को इंटरव्यू दिया। जिस पर सोशल मीडिया में चर्चा जारी है। अधिकांश लोगों की राय है कि ज्वलंत मसलों पर टाइम्स नाउ के अर्नब गोस्वामी ने पीएम मोदी को अटैैक नहीं किया। लिहाजा यह इंटरव्यू भी एक खानापूर्ति ही साबित होकर रह गया।
मीडिया के कुछ लोगों को तो पूर्वाग्रही कहा जा सकता है और प्रतियोगी भाव कि प्रधानमंत्री ने अर्णब गोस्वामी को ही पहले इंटरव्यू के लिए क्यों चुना? हम जैसे पत्रकार मानते हैं कि यह अर्णब गोस्वामी की बड़ी सफलता है, जो प्रधानमंत्री को अपने चैनेल को इंटरव्यू के लिए तैयार कर सके। इसी तरह नरेंद्र मोदी ने भी पुराने ढर्रे को त्यागकर दूरदर्शन अथवा लोक सभा, राज्य सभा टी.वी. चैनलों के बजाय एक निजी चैनल को इंटरव्यू देने का फैसला कर नया अध्याय जोड़ा। यूं उनकी सरकार दावा यही करती है कि प्रसार भारती के दूरदर्शन चैनल की पहुंच दूरदराज के गांवों सहित देश के हर कोने में है, जहां निजी अंग्रेजी चैनल तो क्या हिंदी चैनल की पहुंच भी नहीं है।