Advertisement

सत्येन्द्र प्रकाश

चंबल में खुलेगा 'सुनीलजाना स्कूल ऑफ़ फोटोग्राफी'

चंबल में खुलेगा 'सुनीलजाना स्कूल ऑफ़ फोटोग्राफी'

डाकुओं की शरणस्थली, बीहड़ और पिछड़ेपन से ग्रस्त चंबल का इलाका अब दूसरी वजहों से भी जाना जाएगा। हाल ही में पांच नदियों के संगम स्‍थल पंचनदा पर जन-संसद का आयोजन करने वाले, अवाम का सिनेमा के सर्वेसर्वा शाह आलम यहां देश के महान फोटोग्राफर रहे पद्मश्री-पद्मविभूषण से सम्मानित सुनील जाना की याद में 'सुनील जाना स्कूल ऑफ़ फोटोग्राफी' खोलने जा रहे हैँ।
चंबल की जनक्रांति की याद में पचनदा में होगा जनसंसद का आयोजन

चंबल की जनक्रांति की याद में पचनदा में होगा जनसंसद का आयोजन

जंग-ए-आजादी और चंबल’ यह 1857 की जनक्रांति की स्मृति में आयोतित उस जन-समागम का शीर्षक है, जो अगले हफ्ते 25 मई को चंबल की पांच नदियों के संगम और क्रांति का ह्रदयस्थल ‌रहे पचनदा में आयोजित है। यह दिन चंबल के इतिहास में बहुत अहम है।
यतीन्द्र मिश्र को मिलेगा ‘स्वर्ण कमल’ सम्मान

यतीन्द्र मिश्र को मिलेगा ‘स्वर्ण कमल’ सम्मान

भारत सरकार के फिल्म समारोह निदेशालय ने यतीन्द्र मिश्र को ‘स्वर्ण कमल’ सम्मान से नवाजने का निर्णय लिया है। हिंदी कवि, संपादक और संगीत अध्येता मिश्र को यह सम्‍मान देने की घोषणा बीते सात अप्रैल को की गई।
दिग्गजों की मौजूदगी में हुआ डीपीटी की किताब ‘स्वयंसिद्ध’ का लोकार्पण

दिग्गजों की मौजूदगी में हुआ डीपीटी की किताब ‘स्वयंसिद्ध’ का लोकार्पण

नवें दशक से मराठा सरदार के नाम से चर्चित एवं वरिष्ठ राजनीतिक शरद पवार के जीवन पर आधारित उनकी जीवनी ‘स्वयंसिद्धः शरद पवार का जीवन और समय’ का लोकार्पण वरिष्ठ हिन्दी कवि केदारनाथ सिंह एवं पूर्व योजना आयोग सदस्य डॉ. सैयदा हमीद द्वारा कल शाम दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 में किया गया, जिसमें एनसीपी महासचिव एवं मुख्य प्रवक्ता देवी प्रसाद त्रिपाठी (जीवनी लेखक), पवार की पुत्री सुप्रिया सुले, साहित्यकार अशोक वाजपेयी, हर्षवर्धन नेवटिया, एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल, जया बच्चन, राजीव शुक्ला समेत प्रकाशन परिवार प्रमुख शिरकत रही|
साहित्य अकादेमी की महत्तर सदस्यता का ‘नामवर’ होना

साहित्य अकादेमी की महत्तर सदस्यता का ‘नामवर’ होना

साहित्य अका‌देमी, नई दिल्ली के सभागार में कल की शाम तब एक यादगार शाम बन गई जब अकादेमी ने जीवित किंवदंती बने हिंदी के शीर्षस्‍थ आलोचक नामवर सिंह को महत्तर सदस्यता का अपना सर्वोच्च सम्मान अर्पित किया। अध्यक्ष और सचिव के संयुक्तरूप से शाल व ताम्र-पत्र आदि वयोवृद्ध आलोचनाविद् सिंह को सौंपते ही अनेक आंखों/चेहरों के खिलने के साथ हाल तालियों से गूंज उठा।