गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के उना शहर में एक प्रदर्शन रैली से घर लौट रहे 20 दलितों के एक समूह पर समतर गांव के पास भीड़ ने हमला कर दिया, जिसमें आठ दलित गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना सोमवार शाम करीब पांच बजे हुई। पुलिस ने भीड़ को भगाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और हल्का लाठी चार्ज भी किया। हालांकि पीडि़तों का दावा है कि पुलिस ने उनकी मदद के लिए कुछ नहीं किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से दिए गए संबोधन के एक दावे पर उसी गांव के लोग सवाल उठा रहे हैं जिस गांव का उल्लेख पीएम मोदी ने अपने भाषण में किया है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि आजादी के 70 साल बाद उत्तर प्रदेश के गांव नगला फतेला में उनकी सरकार ने बिजली पहुंचाई। गांव वालों ने खुद आगे आकर इस दावे को झूठ बताया है।
गुजरात में दलितों के खिलाफ अत्याचार बढ़ता ही जा रहा है। राज्य के बंसकअनथा जिले से 27 दलित परिवारों को छुआछूत की वजह से उन्हीं के गांव से निकाले जाने की खबर है। मीडिया के अनुसार ये सभी परिवार अब अपने गांव से 15 किलोमीटर दूर शरणार्थियों की तरह रहने पर मजबूर हैं।
रियो ओलंपिक के खेलगांव में सुरक्षा व्यवस्था को एक और झटका लगा जब डेनमार्क के खिलाडि़यों ने कहा कि उनका सामान चोरी हो गया है। आयोजकों ने उनसे सार्वजनिक माफी मांगी है।
ओलंपिक के लिए गई भारतीय हॉकी टीमों को खेल गांव में कुर्सियों और टीवी सेट की कमियों का सामना करना पड़ा रहा है। टीम के मुख्य कोच रोलेंट ओल्टमैंस ने शिकायत की है कि खिलाड़ियों के कमरे पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
आरएसएस के सहयोगी संगठन द्वारा असम की 31 आदिवासी लड़कियों को गुजरात और पंजाब में भगवा शिक्षा दिलावाने का मुद्दा गरम हो रहा है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया है कि क्या इसी तरह ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का लक्ष्य पूरा करेंगे?
आरएसएस के सहयोगी संगठन असम की 31 आदिवासी लड़कियों को गुजरात और पंजाब में भगवा शिक्षा दिला रहे हैं। देश के कानून को धता बताते हुए असम के सीमावर्ती पांच जिलों से आदिवासी माता-पिता को बहला-फुसलाकर उनसे उनकी बेटियों को दूर कर दिया गया है। गुजरात और पंजाब में उन्हें हिंदूू जीवन प्रणाली अपनाने पर मजबूर किया जा रहा है।
उच्चतम न्यायालय ने अपनी व्यवस्था में कहा है कि पट्टे की अवधि समाप्त होने के बाद भी किसी किसान को उसके कब्जे वाली जमीन से बेदखल नहीं किया जा सकता, बशर्ते उस जमीन का मालिक उसकी काश्तकारी को मान्यता देता है या उससे पट्टे की राशि लेता है।