केंद्र सरकार ने बुधवार को जिस नई विदेश व्यापार नीति की घोषणा की है उसमें अगले पांच वर्षों में निर्यात को दोगुना कर 900 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। नई नीति में कृषि उत्पादों के निर्यात को अधिक प्रोत्साहनों की घोषणा की गई है।
गौहत्या पर प्रतिबंध गाय के संरक्षण के बजाय उल्टा गौ-अर्थव्यवस्था पर ही भारी पड़ सकता है। गौ मांस पर पाबंदी की बहस में पशुपालन, मीट उद्योग और पाबंदी के कानूनों की आड़ में फलते-फूलते अवैध कारोबार को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
सरकार रक्षा उपकरण निर्माण अभियान सफल रहा तो इस क्षेत्र का उत्पादन सात गुना बढ़कर वार्षिक 41 अरब डालर तक और इसका निर्यात करीब 17 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह बात एक रपट में कही गई।
देश का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर गिरा है। सालाना आधार पर तुलना करें तो इस साल जनवरी में यह 11.19 प्रतिशत गिरकर 23.88 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि सस्ते तेल के आयात के कारण व्यापार घाटा थोड़ा सुधरा है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ योजना को इससे गहरा झटका लग सकता है।
जातिगत उत्पीडऩ और भेदभाव के खिलाफ मुखर होता दलित डायस्पोरा इससे चिंतित।भारतीय डायस्पोरा का यह दलित स्वर या दलित डायस्पोरा दुनिया के तमाम बड़े देशों में धीरे-धीरे मजबूत होता दिख रहा है। गैर दलित डायस्पोरा ने तो बड़ी तादाद में (सबने नहीं) अपनी राजनीति स्पष्ट कर दी है, अपना झुकाव स्पष्ट कर दिया है, दलित डायस्पोरा अभी उसके साथ खड़ा नहीं दिख रहा। भारत की नई सरकार से उसे भी अपेक्षाएं हैं। वह भी बेहतर सुविधाओं और व्यापार की संभावनाओं के प्रति आशावान है लेकिन जाति तथा जातिगत उत्पीडऩ के सवाल पर फिलहाल कोई समझौता करता नहीं दिखता।