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Search Result : "दादा साहब फाल्के"

अपमान झेलने के बाद भी अंबेडकर ने देश नहीं छोड़ा: राजनाथ

अपमान झेलने के बाद भी अंबेडकर ने देश नहीं छोड़ा: राजनाथ

आज संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत में ही गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान की प्रस्‍तावना पर विवादित बयान देकर माहौल गरमा दिया।
लंदन में प्रधानमंत्री ने किया अंबेडकर स्मारक का उद्घाटन

लंदन में प्रधानमंत्री ने किया अंबेडकर स्मारक का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंदन में शनिवार को भारतीय संविधान के निर्माता और दलितों के मसीहा बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर को समर्पित एक स्मारक का उद्घाटन किया। डा. अंबेडकर एक छात्र के रूप में अपने ब्रिटेन प्रवास के दौरान 1920 के दशक में यहां रहा करते थे।
अखिलेश मंत्रिमण्डल का विस्तार, 12 नए चेहरों समेत 21 ने ली शपथ

अखिलेश मंत्रिमण्डल का विस्तार, 12 नए चेहरों समेत 21 ने ली शपथ

उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार के मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल के तहत शनिवार को 21 मंत्रियों तथा राज्यमंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। मंत्रिमंडल में कुल नौ मंत्रियों को प्रोन्नति दी गई है जबकि दो कैबिनेट तथा 10 राज्यमंत्रियों समेत कुल 12 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है।
व्हॉट्सएप पर पैगम्बर साहब पर टिप्पणी को लेकर तनाव

व्हॉट्सएप पर पैगम्बर साहब पर टिप्पणी को लेकर तनाव

सोशल नेटवर्किंग एप्लीकेशन व्हॉट्सएप के जरिये पैगम्बर साहब के प्रति कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री वाला संदेश प्रसारित किए जाने से उत्तर प्रदेश के बरेली में तनाव फैल गया है। मामले की छानबीन के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी एक निजी स्कूल के उप प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत था।
मेरी मां से मुझ तक पहुंची शशि की मुस्कराहट

मेरी मां से मुझ तक पहुंची शशि की मुस्कराहट

शशि कपूर को दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलना बहुत ही सुखद है। वह भले ही फिल्मी दुनिया के प्रचलित शब्द सुपर सितारे नहीं थे पर सितारे तो थे ही। उनकी फिल्मों से दर्शक जुड़े क्योंकि लोग उनके सहज अभिनय के कायल थे
शशि कपूर को दादा साहब फाल्के सम्मान

शशि कपूर को दादा साहब फाल्के सम्मान

बीते जमाने के अभिनेता शशि कपूर को दादा साहब फाल्के सम्मान मिलना उनके काम को सम्मान मिलना है। उन्होंने रोमांटिक भूमिकाएं जिस सहजता से निभाईं उसी कुशलता से वह परदे पर अपने गुस्से का इजहार भी करते थे।
सियासी चौराहे पर अकेले ही ठिठके

सियासी चौराहे पर अकेले ही ठिठके

क्या कारण है कि जिस आडवाणी ने पहली बार जनसंघ का अध्यक्ष बनने पर 1973 में एक झटके में बलराज मधोक जैसी मजबूत शख्सियत को पार्टी से जड़ से उखाड़ फेंका, 1974 में जयप्रकाश आंदोलन के उड़ते तीर को पार्टी के लिए पकड़ बाद की इमरजेंसी के प्लावन मं सांप्रदायिकता की अस्पृश्यता धोने में गजब की फुर्ती दिखाई, संघ परिवार के संगठनों द्वारा आजादी के वक्त से ईंट-बैठाकर सुलगाए जा रहे बाबरी-मस्जिद रामजन्म भूमि के मसले को गरमाने के अवसरवादी क्षण को 1990 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार के संकट में अचूक पहचाना, 1996 में भाजपा की सत्ता के लिए अन्य दलों के साथ जरूरी गठजोड़ बनाने के वास्ते खुद पीछे हटकर वाजपेयी को आगे करने की उस्तादी दिखाई, आज वही अपने नेतृत्व में न सहयोगी गठबंधन को उत्साहित कर पाए न अपनी पार्टी की दूसरी प्रांत के नेताओं को?
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