लखनऊ के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र ने शिक्षक द्वारा रिश्वत लेने के दबाव से तंग आकर आत्महत्या कर ली। छात्र को कक्षा में उपस्थिति के रिकॉर्ड के आधार पर परीक्षा प्रवेश पत्र मिलने से शिक्षक रोक रहा था। छात्र ने एक बार 20 हजार रुपया दे भी दिया और घूसखोर शिक्षक ने ज्यादा रकम मांगी। ऐसी मानसिक प्रताड़ना संपूर्ण शिक्षा-व्यवस्था और शासकीय तंत्र के लिए शर्मनाक है।
एक निजी कंपनी द्वारा 251 रुपये में स्मार्ट फोन उपलब्ध कराने की योजना को मेक इन इंडिया की बजाय मेक इन फ्रॉड करार देते हुए कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने इस योजना को लांच करने के अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति पर कड़ा एतराज जताया और सरकार से इस बारे में जवाब देने को कहा।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में अब बीफ परोसे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया के जरिये मुद्दे को और बढ़ा- चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। हालांकि विश्वविद्यालय ने पूरे प्रकरण को एक साजिश बताया है वहीं दक्षिणपंथी संगठनों ने धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया है।
मुंबई और उसके उपनगरों में करीब एक लाख ऑटोरिक्शा वाले निजी टैक्सी कंपनियों के परिचालन और परमिट शुल्क में बढ़ोतरी के खिलाफ आज हड़ताल पर हैं। राज्य परिवहन आयुक्त श्याम वारधाने ने आज एक निर्देश जारी कर निजी कारों, बसों और अन्य वाहनों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में चलाने की इजाजत दी है ताकि यात्रियों को कम असुविधा का सामना करना पड़े।
निजी क्षेत्र के इंडसइंड बैंक ने आज कहा कि उसने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करने वाले पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक डेविड हेडली को नकदी हस्तांतरित करते समय सभी नियमों और दिशानिर्देशों का अनुपालन किया था।
डिजिटल इंडिया का नारा आकर्षक है। रिक्शे वाला और सब्जी विक्रेता अथवा दूर-दराज काम कर रहे मजदूर के पास भी मोबाइल फोन पहुंच गया है। सरकार गौरव के साथ कहने लगी है कि देश में एक सौ करोड़ मोबाइल फोन लोगों के हाथों में दिखने वाले हैं। इस क्रांति से लोगों को सुविधा हो रही है, लेकिन धीरे-धीरे सरकार और निजी कंपनियां गरीब लोगों की जेब अधिक खाली करने लगी है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी द्वारा लिंग परीक्षण जांच संबंधी सुझाव उनकी व्यक्तिगत राय है, यह मंत्रीमंडल का निर्णय नहीं है।
जिसका मन करता है, वह चार कुर्सी-टेबल लगा कर कोचिंग सेंटर खोल लेता है क्योंकि हमारे देश में स्कूल खोलना मुश्किल काम है। स्कूल खोलने के लिए कई औपचारिकताएं होती हैं, जिसे हर कोई पूरा नहीं कर सकता है लेकिन निजी कोचिंग सेंटर के लिए कुछ नहीं करना होता। इसके लिए देश में कोई रेगुलेटरी बोर्ड नहीं। कोचिंग सेंटर्स शिक्षा का रैकेट और संगठित माफिया है। इनके बड़े-बड़े होर्डिंग्स, विज्ञापन छात्रों को आकर्षित करते हैं। शिक्षकों को लगता है कि स्कूल या कॉलेज में क्यों पढ़ाना? वे स्कूल-कॉलेज में वे ट्रिक्स नहीं देते जो कोचिंग सेंटर में देते हैं। कोई नहीं जानता कि देश में कितने कोचिंग इंस्टीट्यूट्स हैं, ये सालाना कितने करोड़ रुपये का कारोबार करते हैं।