वामपंथी पार्टियों की परंपरा तोड़ते हुए माकपा ने अपने प्रदेश सचिव डॉ. सूर्यकांत मिश्र को चुनाव लड़ाने का ऐलान किया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वे वाममोर्चा और कांग्रेस गठबंधन का पोस्टर ब्वॉय होंगे। पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के इस बार चुनाव लडऩे की संभावना कम है।
बंगाल में चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक गरमाहट बढ़ने लगी है। सत्ताधारी और विपक्षी दल एक दूसरे के खिलाफ नई रणनीति ढूंढने में जुटे तो हैं ही, पार्टियों में असंतुष्टों की कतार भी बढ़ रही है। यह स्थिति चौंकाने वाली मानी जा रही है।
पश्चिम बंगाल में छह चरण में विधानसभा चुनाव होंगे और सभी 77247 मतदान केन्द्रों पर केन्द्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी। यह ऐसी घोषणा है, जिसका तृणमूल कांग्रेस अरसे से विरोध करती आ रही है। चुनाव में केन्द्रीय बलों की तैनाती न की जाए और तीन चरणों में मतदान कराए जाएं - इसके लिए तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने तीन बार चुनाव आयोग को ज्ञापन दिया।
‘एकला चलो’ की राजनीति सत्ता के स्वर्णिम दरवाजे नहीं खोल पाती। इसलिए दशकों तक विचारधारा, मूल्यों और नेतृत्व पर निर्भर रहने वाले प्रमुख राजनीतिक दल-कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी समय के साथ सहयोगी बना और छोड़ रहे हैं।
केंद्रीय चुनाव आयोग ने आज पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों की घोषणा की गई है। चुनाव कार्यक्रम की शुरुआत असम और पश्चिम बंगाल से होगी जबकि समापन केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होगा।
कांग्रेस और माकपा को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए अभी गठबंधन की औपचारिक घोषणा करनी बाकी है, लेकिन दोनों दलों का राज्यस्तरीय नेतृत्व स्थानीय स्तर के कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों में मिलकर शिरकत करते हुए गठबंधन के मूड में प्रवेश कर चुका नजर आ रहा है।
भारत और बांग्लादेश के बीच क्षेत्रों की अदला बदली के बाद पश्चिम बंगाल में संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन की पहल और इस क्रम में देश के नागरिक बने लोगों को मतदान का अधिकार प्रदान करने वाला एक विधेयक लोकसभा में पेश किया गया। इसके तहत दो चुनाव कानूनों में संशोधन किए जाएंगे।