भारत में आजादी के आंदोलन में छात्रों और नौजवानों की अहम भूमिका रही थी। शहीद भगत सिंह, जयप्रकाश नारायण (जेपी) और लोहिया तक उस युवा शक्ति के क्रांतिकारी पक्ष के प्रतीक हैं।
आईआईटी बॉम्बे के शिक्षकों के एक समूह ने कहा है कि उच्च शिक्षा के कुछ संस्थान ऐसी गतिविधियों की शरणस्थलियां बन गए हैं, जो राष्ट्रहित में नहीं हैं। शिक्षकों के इस समूह ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से अपील की है कि वे छात्रों को परिसरों में विचारधाराओं के युद्ध का पीड़ित न बनने का संदेश दें।
विभिन्न शिक्षण संस्थानों में सरकार की जरूरत से ज्यादा पहुंच और विरोध एवं मतभेदों को दबाने की कथित कोशिशों की निंदा करते हुए आईआईटी बाॅम्बे के शिक्षकों ने आंदोलनरत जेएनयू छात्रों का समर्थन करते हुए कहा है कि सरकार को लोगों पर राष्ट्रवाद की परिभाषा नहीं थोपनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव पर नजर रखते हुए दलितों को लुभाने की कवायद में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज आरोप लगाया कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने किसी अन्य दलित नेता को आगे नहीं बढने दिया जबकि कांग्रेस हर प्रदेश में युवा दलित नेतृत्व खड़ा करना चाहती है।
जेएनयू राष्ट्रविरोधी नारेबाजी मामले में आरोपी जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की सोमवार को कोर्ट में हुई पेशी के दौरान कुछ वकीलों और अन्य द्वारा जेएनयू छात्रों और शिक्षकों के साथ ही पत्रकारों पिटाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बुधवार को अंतरिम आदेश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और कोर्ट प्रशासन को कन्हैया की पेशी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने को कहा है। साथ ही अदालत ने पेशी के दौरान कोर्ट रुम में वकीलों, पत्रकारों और अन्य के प्रवेश को भी सीमित कर दिया है।
देशद्रोह के मामले में जेएनयू छात्र संघ की गिरफ्तारी के विरोध में विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा बुलाई गई हड़ताल में विश्वविद्यालय के शिक्षक भी शामिल हो गए हैं। शिक्षकों ने कहा कि वे विश्वविद्यालय लॉन में रोजाना राष्ट्रवाद पर कक्षाएं लेंगे।
जमीयत उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना सैयद महमूद मदनी ने कहा है कि मुसलमान बाइचांस इंडियन नहीं बल्कि बाइच्वाइस इंडियन हैं और वतन से प्यार था इसलिए वे भारत में रुके। मदनी ने यह बातें मेरठ में आयोजित हुसूले इंसाफ सम्मेलन में बोलीं।
संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के खिलाफ जेएनयू परिसर में एक आयोजन को लेकर जारी विवाद के बीच विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने लोगों से संस्थान को राष्ट्र विरोधी करार ना देने की अपील की।
संस्कृत विश्वविद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के लिए विशेष अनुदान देने के साथ-साथ सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि स्कूलों में संस्कृत पढ़ाने वाले अध्यापकों को अन्य विषय पढाने वाले शिक्षकों के समान वेतन मिलना चाहिए। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा नियुक्त एक समिति ने इस तरह की कई सिफारिश की हैं।