हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक एक भारतीय-अमेरिकी सात गुड़ियों की एक श्रृंखला पेश करने जा रही हैं। ये गुड़ियाएं आम लड़कियों की जातीय विविधता का प्रतिनिधित्व करेंगी। ये गुड़ियाएं सिर्फ सौंदर्य या खूबसूरती के अलावा पढ़ाई और दिमागी काम पर जोर देंगी।
सरकारी आंकड़ों का दावा है कि गेहूं और लहसुन उत्पादन में प्रदेश अव्वल रहा है और प्रधानमंत्री तक ने किसानों की सुध लेने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की राह अपनाई है
भोपाल में राज्य विधानसभा भवन के पास ही दुर्घटना के शिकार हुए युवक के प्रति पुलिस की असंवेदनशीलता और डॉक्टरी लापरवाही के चलते मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बरेली में एक किसान रैली को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 तक देश के किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि छोटे-छोटे कदम उठाकर कृषि क्षेत्र के सामने खड़ी चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है। रैली में उन्होंने राज्य सरकारों को किसानों को केंद्र सरकार के साथ मिलकर किसानों की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव लाने का भी आह्वान किया।
दालों की बढ़ती कीमतों और दलहन आयात पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार खेसारी दाल पर 55 साल पहले लगा प्रतिबंध हटाने की कवायद में जुट गई है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक पैनल ने इस दाल को खाने के लिए सुरक्षित बताया है और बारे में अंतिम फैसला खाद्य नियामक एफएसएसएआई को करना है। लेकिन स्वास्थ्य से जुड़े इस अहम फैसले को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के नए कुलपति होंगे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के भेजे चार नामों में से जगदीश कुमार के नाम को मंजूरी दी है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को जेएनयू का वीसी बनाए जाने की अटकलों के बाद यह नियुक्ति चर्चाओं में आ गई थी।
कृष्ण और राधा के मिलन, विरह, प्रेम और उपासना को मशहूर कथक नृत्यांगना गौरी दिवाकर ने कथक के जरिये खूबसूरती से पेश किया। इस प्रस्तुती की खास बात यह थी कि यह नृत्य सूफी कवियों की रचनाओं पर किया गया।
‘किनारे की चट्टान’ काव्य संग्रह के लेखक के अनुसार कविता लिखना जटिल प्रक्रिया है। सच कहूं तो मुझे कविता की सारी टेक्निकल डिटेल का आज भी कोई खास पता नहीं है। बस, मन को जो चीज कचोटती है उसे पन्नों पर उतार लेता हूं और कविता बनने या न बनने का निर्णय पाठकों पर छोड़ देता हूं।’ ये बातें काव्य संग्रह ‘किनारे की चट्टान’ के लेखक पवन चौहान ने अपने काव्य संग्रह में कही हैं।