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Search Result : "राम की छवि"

कड़ी सुरक्षा के बीच एमएसजी रिलीज

कड़ी सुरक्षा के बीच एमएसजी रिलीज

लाख विव‌ादों के बाद आखिरकार डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम की फिल्म मैसेंजर ऑफ गॉड (एमएसजी) रिलीज हो गई है। कई सिख संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।
मांझी के बाद कोर्ट डुबाएगा नीतीश की नैया?

मांझी के बाद कोर्ट डुबाएगा नीतीश की नैया?

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) नेता नीतीश कुमार को एक तगड़ा झटका लगा है। पटना हाई कोर्ट ने जीतन राम माझी के मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश के विधायक दल का नेता चुने जाने को अवैध बताया है। और फिलहाल इस पर रोक लगा दी है।
भाजपा को फिर मिला राम रहीम का साथ

भाजपा को फिर मिला राम रहीम का साथ

दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक पार्टियां साम, दाम, दंड भेद के तहत हर दांव आजमा लेना चाह रही हैं। इसी कड़ी में आज डेरा सच्चा सौदा के विवादित प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने की घोषणा की है।
राहुल की मुट्टी खुलने का इंतजार

राहुल की मुट्टी खुलने का इंतजार

हम गांव की चिंता में भटकते राहुल की चल और अचल तस्वीरें देखते हैं लेकिन अभी जानते कि गांवों को खुशहाल बनाने की उनकी नीतियां क्या हैं और वह इसके लिए कौन-कौन से कदम उठाने वाले हैं। हम गरीबों से राहुल के मेलजोल की कोशिशों के बाबत पढ़ते हैं और भरोसा करने को तैयार हैं कि वह उनकी हालत बिना किसी बिचौलिए के जानने चाहते हैं जिस देश में गरीबों के लिए बनी योजनाओं का लाभ अक्सर फर्जी गरीब उठा लेते हैं वहां अब हम जानना चाहते हैं कि राहुल सही गरीबों की शिनाख्त का कौन सा बेहतर तरीका अपनाएंगे। हम जानते हैं क अपने पिता राजीव गांधी की तरह राहुल गांधी भी चिंतित हैं कि गरीबों के लिए केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए प्रत्येक रुपये में सिर्फ 15 पैसे उन तक पहुंचते हैं लेकिन हमारी अब यह जानने की भी अपेक्षा है कि विचौलियों द्वारा चट हो रहे बाकी के 85 पैसे राहुल गरीबों तक कैसे पहुंचाएंगे। हम जानते हैं कि राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना को राहुल गांधी अपनी यूपीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं और उसे पूरे देश में फैलाना चाहते हैं, शहरों मे भी, लेकिन हम यह भी जानना चाहते हैं कि वह इस योजना में व्यापक धांधली कैसे रोकेंगे, कैसे सुनिश्चित करेंगे कि सही लोगों को जॉब कार्ड मिले, काम पर आए मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी मिल पाए और इस योजना के जरिये गांवों में पक्के आधारभूत ढांचे भी बन पाएं।
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