ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने हिंदुओं से आह्वान किया कि वे दस बच्चे पैदा करें और अपने समुदाय की संख्या को बढ़ाएं। नागपुर में आरएसएस के समर्थन से संपन्न तीन दिवसीय धर्म संस्कृति महाकुंभ में संत समाज ने एक राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनाने और गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक केंद्रीय कानून बनाने का भी आह्वान किया। इस दौरान मंच पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी उपस्थित थे।
स्वामी दयानंद और राजा राममोहन राय, महात्मा गांधी समेत कई संत, महात्मा, समाज सुधारकों ने महिलाओं को अंधविश्वास तथा सामाजिक कुरीतियों से बचाने के लिए जीवन पर्यंत काम किया और क्रांतिकारी बदलाव हुए। इसी भारतीय समाज में किसी मंदिर में महिलाओं के पूजा करने से बलात्कार जैसे अपराध होने या साईं बाबा की पूजा से सूखा पड़ने जैसी बातें शंकराचार्य के रूप में मान्यता प्राप्त स्वामी स्वरूपानंद के मुंह से सामने आना बेहद आश्चर्यजनक और शर्मनाक है।