व्यापमं की जांच आखिरकार सीबीआई के पास पहुंच गई। अब तक करीब 45 जानों की लील चुके इस घोटाले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित राज्यपाल तक घिरे हैं। पिछले कुछ दिनों में जिस तेजी से घटनाक्रम बदला है, उससे साफ है कि मध्यप्रदेश की सियासत में भारी उथल-पुथल होनी है।
व्यापमं घोटाले की सीबीआई जांच के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अर्जी पर हाईकोर्ट ने कोई आदेश नहीं दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि जब इस मामले में पहले ही सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच की अपील की जा चुकी है जिस पर नौ जुलाई को सुनवाई होनी है इसलिए इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही हाईकोर्ट अपना रूख तय करेगा। हाईकोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई 20 जुलाई को करेगा।
घोटाले की जांच करने वालों से लेकर घोटाले में शामिल आरोपियों की मौतों के सिलसिले ने सीबीआई जांच की मांग को बल दिया, मुख्यमंत्री को भी बोलना पड़ा कि वह हाई कोर्ट को सीबीआई जांच के लिए लिखेंगे। इसके बाद मंगलवार को ही उन्होंने हाईकोर्ट के सामने इस बाबत अर्जी भी लगा दी कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए।
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार के खिलाफ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग करते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी निगरानी में जांच कराने की भी मांग की।
एनजीओ की विदेशी फंडिंग पर शिकंजा कसने में जुटी केंद्र सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की कंपनी सबरंग कम्युनिकेशन के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।
संयुक्त राष्ट्र से जात आधारित भेदभाव को स्वीकार कर अपने मसौदे में शामिल करने की मांग ने जोर पकड़ा। एशिया दलित राइट्स फोरम ने मसौदे में सात संशोधन पेश किए।