30 जुलाई को दो बहुचर्चित जनाजे निकले। एक खुले समुंदर के पास रामेश्वरम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ, तिरंगे में लिपटा। दूसरा, नागपुर केंद्रीय कारावास की कालकोठरी से निकाल फंदे पर झुला कर कब्रिस्तान के लिए रुखसत किया गया। एक सिंहासन चढ़ि चला तो एक बंधा जंजीर। काल की दो लीलाएं। मृत्यु के दो थिएटर। लेकिन एक ही देश के दो नागरिक, एक ही मजहब के दो लोग। हालांकि मृत्यु पूर्व जीवन के दो अलग-अलग रंगमंच। अब्दुल कलाम अपने रंगमंच पर भारतीय राज्य प्रतिष्ठान के हीरो और याकूब मेमन भारतीय राज्य प्रतिष्ठान का मुजरिम तो मुजरिम, विलेन भी। पहले को मौत के बाद भी मुख्यधारा जनमानस और सूचना-प्रचार तंत्र से ‘अमर रहे’ और ‘जिंदाबाद’ की विदाई। दूसरे के लिए मौत के पहले ही उसी मानस और तंत्र से ‘फांसी दो, फांसी दो’ तथा ‘मुर्दाबाद’ की गूंज जिसके आगे न्यायपालिका भी नतमस्तक हो गई।
बंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन को फांसी से बचाने के लिए कई पार्टी के सांसदों, रिटायर्ड जजों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और फिल्म जगत की मशहूर हस्तियों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखा है।
बंबई बम घमाकों के दोषी याकूब मेमन के बचाव में उतरे फिल्म स्टार सलमान खान ने अपने सभी ट्वीट वापस ले लिए हैं। उन्होंने इस मामले पर माफी भी मांगी है। सलमान ने कहा था कि असली गुनहगार टाइटर है, उसके भाई को फांसी मत दो।
आज सुबह श्रीनगर में प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों के दफ्तर और टावर के पास दो ग्रेनेड धमाके हुए। इन हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है लेकिन टेलीकॉम कंपनियों में दहशत पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को याकूब अब्दुल रजाक मेमन की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जिसमें उसने 1993 के मुंबई बम विस्फोटों के मामले में अपनी मौत की सजा की समीक्षा करने का आग्रह किया था।
वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास स्थान ह्वाइट हाउस में जोरदार धमाके की वजह से वहां अफरा-तफरी मच गई। धमाके के कुछ ही देर बाद राष्ट्रपति ओबामा अपने परिवार के साथ के ह्वाइट हाउस के दक्षिणी आंगन से एक हेलिकॉप्टर में बाहर निकलने वाले थे।