देश के सामाजिक ताने-बाने को हमेशा के लिए बदल कर रख देने वाले 1984 के सिख विरोधी दंगों की रोंगटे खड़े करने वाली दास्तां को कहानियों के रूप में एक नई किताब में पेश किया गया है।
वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों की 32वीं बरसी पर राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह ने कहा है कि कर्तव्य की उपेक्षा करने वाले और दंगाइयों पर आंखें बंद कर लेने वाले सरकारी अधिकारियों को हिंसा में सहायता करने वाला घोषित किया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार के सूत्रों ने कहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा अपनी निजी पहल के तहत कश्मीर समस्या पर हुर्रियत नेताओं से मुलाकात की है। सूत्रों ने इन ख़बरों को निराधार बताया कि सरकार की पहल पर सिन्हा के नेतृत्व में एक दल हुर्रियत नेताओं से जम्मू-कश्मीर में बात कर रहा है। सरकार ने कहा कि सिन्हा अपनी पहल पर ही कश्मीर गए हैं।
बंगाल के लोग सभ्य और समझदार माने जाते हैं। बंगाल जहां के राजा राम मोहन राय ने विधवा विवाह की शुरुआत की थी। बंगाल ने समाज में सती प्रथा को समाप्त करने के लिए अग्रणी भूमिका निभायी थी। आज उसी बंगाल में महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। एक समय दहेज प्रथा व महिला के सम्मान के लिए विश्व में आवाज उठाने वाला बंगाल आज खुद दहेज प्रथा की चपेट में है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी ) की रिपोर्ट का दावा है।
सीबीआई ने इस साल फरवरी में रोहतक में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा एवं आगजनी की घटनाओं की जांच के लिए आज तीन मामले दर्ज किए। इनमें हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु का घर जलाए जाने की घटना से संबंधित मामला भी शामिल है।
केरल के कन्नूर जिले में सोमवार को सत्ताधारी पार्टी सीपीएम के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। इस वारदात के पीछे कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं का हाथ बताया जा रहा है।
कश्मीर में हिंसा और बंद को सरकार के राजपत्रित अधिकारी और पुलिस कर्मी भी हवा दे रहे हैं। अलगाववादियों की मंशा को पूरा करने में अधिकारी बराबर मदद कर रहे हैं। ऐसे 150 सरकारी मुलाजिमों की अब तक पहचान की जा चुकी है। सूबे की सरकार ने हालांकि इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कश्मीर घाटी के हंदवाडा में आज फिर से कर्फ्यू लगा दिया गया है जबकि श्रीनगर के तीन पुलिस थाना क्षेत्रों में अभी भी प्रतिबंध जारी है। हिंसा और झड़पों के बाद कर्फ्यू और प्रतिबंधों की वजह से कश्मीर घाटी में आज लगातार 78वें दिन भी आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित रहा।
हिंसाग्रस्त जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मुद्दे की जांच के लिए वहां जाने की अनुमति मांग रहे संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) को भारत ने स्पष्ट कहा है कि भारतीय जम्मू व कश्मीर राज्य की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले गुलाम कश्मीर से नहीं की जा सकती।
कर्नाटक में प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज से बचने का प्रयास करते समय जख्मी हुए एक व्यक्ति की आज मौत हो गई जिसके साथ राज्य में जारी हिंसक प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या दो हो गई। इस विवाद में सबसे अधिक प्रभावित बेंगलूरू शहर के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। कर्नाटक एवं तमिलनाडु में आज कुछ प्रदर्शनों के दौरान लक्ष्य बनाकर हमले किए गए।