जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार देश में 72.89 करोड़ लोग नॉन वर्कर हैं। इनमें से 3.7 लाख लोग भिखारी हैं। आंकड़ों के अनुसार देश की कुल आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 14.23% है।
बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने नए सियासी समीकरणों का संकेत देते हुए मंगलवार को उत्तर प्रदेश में कहा कि देश में दलितों को उनका हक दिलाने के लिए अभी बहुत लड़ाई बाकी है और यदि मौका मिला तो वह बीएस-4 के साथ मिलकर इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे।
भाजपा यूपी को जीतने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी तथा उनके विकास कार्यों पर ही ध्यान दे रही है। पार्टी 100 दिन की रथ यात्रा परिवर्तन यात्रा के नाम से शुरु करने जा रही। उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के लिए यह रथ यात्रा पूरे प्रदेश में निकाली जाएगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य मोदी सरकार की पिछले दो साल की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाना है।
भारत की पिछले 12 साल की औसतन 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर आम आदमी के जीवन में महत्वपूर्ण सुधार लाने में नाकाम रही है। यह बात जाने-माने विकास अर्थशास्त्राी ज्यां द्रेज ने रविवार को कही।
लुटने के बाद जांच-पड़ताल की जगह अब घोटाला न हो, इसके लिए नजरदारी के इंतजाम किए जा रहे हैं। सारधा जैसी चिटफंड कंपनियों को अंकुरित होने के पहले ही खत्म किया जा सके- इसके लिए अलग से एक खुफिया एजेंसी बनाने की तैयारी कर रही है भारत सरकार। इस एजेंसी का मुख्य काम होगा- अगर कोई फ्रॉड कंपनी मोटे ब्याज और मुनाफे का लालच देकर निवेश कराती है, तो उसकी जानकारी तुरंत ही शीर्षस्थ स्तर तक पहुंचे और कार्रवाई हो सके। यह एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मातहत काम करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में कल फेरबदल हो सकता है। मंगलवार को सुबह 11 बज नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। कुछ को मंत्रिपद से हटाया भी जा सकता है। फेरबदल का लंबे समय से इंतजार है। मोदी 7 जुलाई को 4 अफ्रीकी देशों के दौरे पर जाने वाले हैं। माना जा रहा है कि दौरे से पहले मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद ये दूसरा फेरबदल होगा।
पीएम नरेंद्र मोदी और उनके प्रशंसक लाख दावा कर लें कि देश में उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद विकास बेहतर ढंग से हुआ है। लेकिन वास्तविकता यह है कि मोदी सरकार देश में रोजगार पैदा करने में बुरी तरह विफल साबित हुई है।
भारत में एक दशक में खेतिहर मजदूरों समेत आर्थिक गतिविधियों की विभिन्न श्रेणियों में शामिल लोगों के विवाह की औसत आयु में बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। जिसे सकारात्मक माना जा रहा है।