उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत से शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में पचास शेयरों पर आधारित निफ्टी 9,122.75 अंक की नई ऊंचाई पर, जबकि तीस शेयरों पर आधारित बीएसई 29,561.93 अंक पर पहुंच गया है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद बसपा ने ईवीएम के साथ छेड़छाड़ किए जाने का आरोप लगाया जिसके बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस संबंध में जांच की मांग की लेकिन चुनाव आयोग ने कहा कि इस आरोप का कोई आधार नहीं है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ वित्तमंत्री अरूण जेटली की ओर से दायर मानहानि के मामले की दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई मंगलवार को भी जारी रही। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने लगातार दूसरे दिन जेटली से जिरह की।
समाजवादी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रोडशो बिना पूर्वानुमति के हुआ है और उनकी रैली से पहले टाउन हॉल का घेराव किया, जिसके कारण यहां तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गयी।
करगिल शहीद की बेटी गुरमेहर कौर का दावा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्रा इकाई के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान छेड़ने पर उसे कथित तौर पर एबीवीपी सदस्यों से दुष्कर्म की धमकी मिल रही है। इस मामले में गुरमेहर ने सोमवार को दिल्ली महिला आयोग में शिकायत की। इस बीच केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने गुरमेहर पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कोई गुरमेहर के दिमाग में जहर भर रहा है। जबकि केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह ने कहा कि दुनिया का कोई भी प्रजातंत्र देश की संप्रभुता पर चोट की इजाजत नहीं देता।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में नेपाल से लगे तराई और पूर्वी अंचल के 11 जिलों की 51 विधानसभा सीटों के लिये सोमवार को 57. 36 प्रतिशत मतदान हुआ।
राजनीतिक दलों एवं उम्मीदवारों के चुनावी खर्च में पारदर्शिता लाने, पेड न्यूज पर लगाम लगाने, चुनाव आयोग के दायरे में विस्तार करके देश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भाजपा सांसद वरूण गांधी का निजी विधेयक जन प्रतिनिधित्व अधिनियम संशोधन विधेयक 2016 लोकसभा में विचार के लिए रखा जायेगा।
चुनाव प्रचार में नेताओं के भाषण को लेकर चुनाव आयोग ने नाराजगी जाहिर की है। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को नोटिस जारी करते हुए भाषणों पर संयम बरतने के निर्देश दिए हैं।
लोकसभा चुनाव में हारने के बाद राज्यसभा के रास्ते सांसद बनने पर रोक लगाने संबंधित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सवालिया निशान उठाए हैं। न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी और विनोद गोयल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि कानून बनाना और उसमें बदलाव करना न्यायपालिका का काम नहीं है, इसके लिए सरकार को चुना जाता है। न्यायपालिका केवल इस बात की समीक्षा कर सकती है कि यह कानून देश के बुनियादी ढांचे व संविधान के अनुरूप बनाए गए हैं या नहीं।