Advertisement

Search Result : "Retired judges"

ओआरओपी : रिटायर्ड सैन्‍य कर्मियों का संघर्ष जारी, मोदी आखिर कब लागू करेंगे

ओआरओपी : रिटायर्ड सैन्‍य कर्मियों का संघर्ष जारी, मोदी आखिर कब लागू करेंगे

रिटायर्ड सैन्‍य कर्मियों के प्रदर्शन के बाद 7 नवंबर 2015 को केंद्र सरकार ने वन रैंक-वन पेंशन स्‍कीम को लागू करने की घोषणा की थी। जिसके तहत सशस्‍त्र सुरक्षा बलों के सभी रिटायर्ड कर्मचारियों को एक जैैसी पेंशन मिलनी थी। सरकार की इस स्‍कीम को लागू करने में हो रही देरी पर रिटायर्ड सैन्‍य कर्मियें ने सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी मोदी सरकार से देरी पर लिखित जवाब मांंगा है। कोर्ट ने सरकार को जवाब देने के लिए 8 माह का समय दिया है।
कैसे मिले जल्दी न्याय, हाईकोर्टों में 458 न्यायाधीशों की कमी

कैसे मिले जल्दी न्याय, हाईकोर्टों में 458 न्यायाधीशों की कमी

कानून मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में 458 न्यायाधीशों की कमी है। ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब न्यायपालिका और सरकार के बीच हाईकोर्टों में न्यायाधीशों की भावी नियुक्ति को दिशा देने वाले एक दस्तावेज के विभिन्न उपबंधों को लेकर मतभेद हैं।
सैनिकों को दे न दे, जजों को वन रैंक वन पेंशन देगी सरकार

सैनिकों को दे न दे, जजों को वन रैंक वन पेंशन देगी सरकार

देश के सैनिकों की दशकों से उठ रही वन रैंक वन पेंशन की मांग को पूरा करने में हीला हवाली कर रही केंद्र सरकार देश के उच्च न्यायालयों के जजों को वन रैंक वन पेंशन देने की तैयारी कर चुकी है।
तीन पूर्व जजों और प्रभु चावला ने की ललित मोदी की मदद

तीन पूर्व जजों और प्रभु चावला ने की ललित मोदी की मदद

नए-नए खुलासे कर अपने साथ कई लोगों को लपेटने वाले ललित मोदी के मददगारों की सूची लंबी होती जा रही है। विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज और राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जजों पर भी लंदन में मोदी को मदद पहुंचाने के आरोप लगे हैं।
विवादित कॉलेजियम एवं न्यायिक नियुक्ति आयोग पर राष्ट्रपति हस्तक्षेप करेंः बार एसो

विवादित कॉलेजियम एवं न्यायिक नियुक्ति आयोग पर राष्ट्रपति हस्तक्षेप करेंः बार एसो

अखिल भारतीय बार संघ (एआईबीए) ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से शिकायत की है कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में कम से कम 125 जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में देरी पूर्ववर्ती कॉलेजियम प्रणाली खत्म करने से उत्पन्न हुई संवैधानिक शून्यता के कारण हो रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) के गठन में भी देर की जा रही है।
Advertisement
Advertisement
Advertisement