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एक्सक्लूसिव-  सभी सीवर-सेप्टिक मौतों पर मुआवजा न देने की केंद्र की कोशिश नाकाम

एक्सक्लूसिव- सभी सीवर-सेप्टिक मौतों पर मुआवजा न देने की केंद्र की कोशिश नाकाम

केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2014 के फैसले के तहत सीवर-सेप्टिक टैंक में मौतों पर दस लाख का मुआवजा देने से बचने के लिए अदालत में की थी अपील
अंगूरी भाभी ने ‘घर’ छोड़ दिया!

अंगूरी भाभी ने ‘घर’ छोड़ दिया!

गजब हो गया है। विभूति जी और लड्डू के भैया की तो छोड़िए जो सुन रहा है वही दुखी है। भाभीजी घर पर हैं की भाभी यानी अंगूरी ने अपना घर यानी धारावाहिक छोड़ दिया है। पंगा कहीं और काम को लेकर हुआ है ऐसा बताया जा रहा है।
अमृता राव भी टीवी की ओर

अमृता राव भी टीवी की ओर

मेरी आवाज ही पहचान है, टीवी धारावाहिक से अभिनेत्री अमृता राव छोटे परदे पर कदम रखने जा रही हैं। यह उनका पहला टीवी धारावाहिक है। दो गायक बहनों के जीवन पर बने इस धारावाहिक का लंबे समय से दर्शकों को इंतजार है।
कहानी - दूर है किनारा

कहानी - दूर है किनारा

अंजू शर्मा मूलतः कवयित्री हैं। उनकी कविताएं आसपास की घटनाओं और जीवन के अनुभवों से गुजर कर शब्दों का चोला पहनती हैं। उनकी कविता चालीस साला औरतें पिछले दिनों बहुत चर्चितं रही थी। हाल ही कहानी लिखना शुरू करने वाली अंजू की कहानियों ने अलग मुकाम बना लिया है। सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां प्रकाशित।
लड़कियों का आर्थिक स्वालंबन जरूरी - उमा भारती

लड़कियों का आर्थिक स्वालंबन जरूरी - उमा भारती

उमा भारती अपने संसदीय क्षेत्र की लड़कियों को पढ़ाना चाहती हैं ताकि आर्थिक स्वालंबन आए। उनके अनुसार लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए यह सबसे जरूरी कदम है। गंगा को निर्मल बनाना भी उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है।
केएस तूफान की कहानी - बुद्धिमत्ता

केएस तूफान की कहानी - बुद्धिमत्ता

3 जून 1944 को नजीबाबाद, जिला बिजनौर में जन्म। लहरों का संघर्ष लघुकथा संग्रह। स्वप्न भंग, टूटते संवाद कहानी संग्रह। नारी - तन मन गिरवी, कब तक (नारी विमर्श), सफाई का नरक (दलित विमर्श) और अंधेरे में रोशनी (दलित संघर्ष) पर निबंध संग्रह। कई पुरस्कारों से सम्मानित।
सारिका को भी लगेगा डर

सारिका को भी लगेगा डर

सारिका का कहना है कि वह किसी भी तरह का किरदार अदा करने को तैयार हैं, चाहें फिर वह बड़े पर्दे पर हो या छोटे पर्दे पर लेकिन किरदार चुनौतीपूर्ण होना चाहिए।
समाज का चितेरा

समाज का चितेरा

सामाजिक ताना-बाना समझना किसी के लिए भी आसान नहीं है। इस जटिलता को भी असगर वजाहत ने बहुत अच्छी तरह न सिर्फ समझा बल्कि उसे बयान करने का शिल्प भी कमाल का है। यह शब्द जाने-माने साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के हैं, जो उन्होंने असगर वजाहत की कहानियों को पढ़ने के बाद कहे थे।
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