देश में गोमांस पर छिड़ी बहस के बीच जयपुर में गाय को बचाने का संदेश देने वाली कलाकृति पर विवाद खड़ा हो गया। इस मामले में पुलिस ने दो कलाकारों को हिरासत में ले लिया। हालांकि, बाद में खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने घटना पर खेद व्यक्त किया है।
वसुंधरा राजे की राजस्थान सरकार ने उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें जयपुर के जवाहर कला केंद्र की गवर्निंग बॉडी में भारतीय मूल के ब्रिटिश मूर्तिकार अनीश कपूर को शामिल किया गया था। कपूर ने हाल ही में मोदी सरकार के शासन को हिंदू तालिबान करार देते हुए ब्रिटिश अखबार में एक लेख लिखा था। दो दिन पहले ही भाजपा शासित राजस्थान सरकार ने उन्हें बोर्ड में नामित किया था, जिसका भाजपा के भीतर ही काफी विरोध हुआ।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने शनिवार को कहा कि बच्चों को सीमा पर तैनात सैनिकों से जाकर मिलने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि उनमें इन सैनिकों की सेवाओं के प्रति एक बेहतर समभुा विकसित हो सके और साथ ही सैनिकों की सेवाओं के प्रति देश का आभार भी व्यक्त किया जा सके।
साहित्य अकादमी का पुरस्कार लौटाने का सिलसिला एक नई परिस्थिति का संकेत देता है और एक अभूतपूर्व माहौल की रचना भी करता है। परिस्थिति नई है, वरना अभी तक यह माना जाता रहा है कि कला और साहित्य में राज्य द्वारा सम्मानित किए जाने के लिए होड़ लगी रहती है। पुरस्कार लौटाने की व्यग्रता इस पैमाने पर पहले नहीं देखी गई।
चुनाव अपने यहां सचमुच उत्सव हैं। चुनाव लड़ने-लड़ाने वालों को छोड़कर सभी इसको इंज्वॉय करते हैं। और बिहार चुनाव तो उत्सवों के समय ही होते रहे हैं। बिहार का आदमी थोड़ा हटकर होता है। उसे अमेरिकी चुनाव की भी अंदरुनी जानकारी होती है तो यह कैसे कह सकते हैं कि बिहार में हो रहे चुनाव के अंदर की खबरें उसके पास नहीं होंगी।
जानेमाने गीतकार गुलजार ने बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता के विरोध में लेखकों की ओर से साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाए जाने को सही बताते हुए कहा कि देश में ऐसे हालात पहले कभी नहीं देखे गए।
लेखक एम एम कलबुर्गी की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए साहित्य अकादमी ने आज सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर राज्य एवं केंद्र सरकारों से इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाने की अपील की।
आज साहित्य अकादमी का नजारा कुछ बदला-बदला सा है। ‘लेखकों का यह घर’ मीडिया कर्मियों के जमावड़े से गुलजार था। लेखक प्रदर्शनकारियों के बाने में थे। पहली बार हुआ कि अकादमी की इमारत में जाने के लिए पहचान पूछी जा रही थी।
देश में बढ़ती कट्टरता, अभिव्यक्ति की आजादी पर हमलों और असहिष्णुता के खिलाफ पुरस्कार लौटाने लेखकों की फेहरिस्त में प्रसिद्ध उपन्यासकार अनिता देसाई और विक्रम सेठ भी शामिल हो सकते हैं।