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कला-संस्कृति

मैथिली भाषा का मूल ‘मुंडा’ भाषा में है- सीताकांत महापात्र

मैथिली भाषा का मूल ‘मुंडा’ भाषा में है- सीताकांत महापात्र

साहित्य अकादेमी स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में प्रस्तुत ‘प्राचीन भारतीय साहित्य में प्रेम और प्रार्थना’ विषयक व्याख्यान में कवि-भाषाविद् एवं अकादेमी के महत्तर सदस्य सीताकांत महापात्र ने पूर्वोत्तर भारत के छः आदिवासी भाषा समूह - संथाल, उराव, मुंडा, कोंड आदि के आधार पर कहा कि प्रतीकों से सजी सबसे बेहतर भाषा इनके गीतों में देखी जा सकती है। कहा कि भोजपुरी के बाद सबसे प्रचलित भाषा मैथिली का मूल मुंडा भाषा में निहित है।
आलोचक डा. धर्मवीर का निधन

आलोचक डा. धर्मवीर का निधन

दलित चिंतक एवं आलोचक डा. धर्मवीर का निधन नौ मार्च को हो गया। इससे सरोकारी समाज चिंतक, साहित्यकारों में शोक की लहर रही। उनके चिंतन, लेखन और व्यक्तित्व से प्रभावित और दलित विमर्श से जुड़े अनेक लेखनजीवियों ने कल शाम दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में शोकसभा का आयोजन कर उन्हें श्रद्घांजलि अर्पित की जाएगा।
साहित्य अकादमी में महिला दिवस

साहित्य अकादमी में महिला दिवस

साहित्य अकादमी, दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर संवाद और कवयित्री सम्मेलन आयोजित कर मनाया। इस मौके पर चर्चित लेखिका चित्रा मुद्गल ने कहा ने स्त्री लेखन और देह विमर्श के मौजूं सवालों को उठाया।
शास्त्रीय संगीत की मौलिकता बरकरार रखना मुश्किल है : गिरिजा देवी

शास्त्रीय संगीत की मौलिकता बरकरार रखना मुश्किल है : गिरिजा देवी

ठुमरी की रानी गिरिजा देवी का कहना है कि आज के दौर में भारतीय शास्त्रीय संगीत की मौलिकता बरकरार रखना काफी मुश्किल हो गया है। शास्त्रीय संगीत की 87 वर्षीय प्रख्यात गायिका ने पीटीआई भाषा से कहा, नहीं, मुझे नहीं लगता कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की मौलिकता को समकालीन परिवर्तनों के इस दौर में बरकरार रखा जा सकता है लेकिन इसको लेकर अफसोस जाहिर करने का भी कोई मतलब नहीं है।
लिंकन के दुख की अलग कहानी कहती है यह किताब

लिंकन के दुख की अलग कहानी कहती है यह किताब

फोलियो पुरस्कार प्राप्त लेखक जॉर्ज सौंडर्स अपना नया उपन्यास लिंकन इन द बाड्रो लेकर आए हैं। एक अकेली रात की पृष्ठभूमि पर आधारित इस उपन्यास में लेखक ने 11 वर्षीय बेटे विली की मौत से आहत अब्राहम लिंकन के दुख को दर्शाया गया है। यह वही वक्त था जब अमेरिका में गृहयुद्ध को लेकर नाराजगी उफान पर थी।
अनुवाद इतिहास को वर्तमान से जोड़ने का बड़ा प्रयास है-सीतांशु यशश्चंद्र

अनुवाद इतिहास को वर्तमान से जोड़ने का बड़ा प्रयास है-सीतांशु यशश्चंद्र

कल छह दिवसीय साहित्योत्सव के अंतिम दिन ‘अनुवाद पुनर्कथन के रूप में’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन वक्तव्य में प्रख्यात गुजराती लेखक सीतांशु यशश्चंद्र ने कहा कि कृष्ण कथा और राम कथा का हमारे देश में कई भाषाओं में अनूदित हो रोचक पुनर्कथन हुआ है, और यह आधुनिक भाषाओं में भी हो रहा है। यह इतिहास को वर्तमान से जोड़ने का बड़ा प्रयास है। उन्होंने अनुवाद प्रक्रिया में आने वाले बिखराव फैलाव और छाया अनुवाद की चर्चा करते हुए संस्कृत/प्राकृत/पालि/हिंदी/गुजराती आदि के अनुवादों से कई उदाहरण दिए।
पाकिस्तान के बिना सार्क साहित्योत्सव

पाकिस्तान के बिना सार्क साहित्योत्सव

दिल्ली में तीन दिन का सार्क साहित्य उत्सव शुरू हो गया है। सभी सार्क देशों की उपस्थिति है सिवाय पाकिस्तान के। यह उत्सव सार्क लेखकों के लिए फाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर एंड लिटरेटर (एफओएसडब्लूएएल) और विदेश मंत्रालय के सौजन्य से हो रहा है।
विभाजन के बाद वतनपरस्त मुसलमानों ने ज्यादा मानसिक प्रताड़ना झेली - नासिरा शर्मा

विभाजन के बाद वतनपरस्त मुसलमानों ने ज्यादा मानसिक प्रताड़ना झेली - नासिरा शर्मा

साहित्योत्सव के चौथेदिन ‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता हिंदी लेखिका नासिरा शर्मा ने कहा, विभाजन की हिंसा से जहां लोग सीधे प्रभावित हुए, वहीं वतनपरस्त मुसलमानों को मानसिक प्रताड़ना ज्यादा झेलनी पड़ी। वे अशोक तिवारी के सवालों के जवाब दे रही थीं।
लोक-संस्कृति पर पड़ रहा पूंजीवाद का प्रतिकूल प्रभाव-वि.ना. तिवारी

लोक-संस्कृति पर पड़ रहा पूंजीवाद का प्रतिकूल प्रभाव-वि.ना. तिवारी

साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथप्रसाद तिवारी का मानना है कि संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण के लिए जारी कोशिशों के बावजूद पूंजीवादी उपभोक्तावाद का लोक-संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
मार्क्सवाद व्यक्ति को कम महत्व देता है- राम चंद्र गुहा

मार्क्सवाद व्यक्ति को कम महत्व देता है- राम चंद्र गुहा

साहित्योत्सव 2017 केतीसरे दिन शाम को प्रख्यातविद्वान एवं इतिहासकार डॉ. रामचंद्र गुहा ने कहा कि मार्क्सवाद व्यक्ति को कम महत्त्व देता है। वे अकादेमी की प्रतिष्ठित संवत्सर व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘ऐतिहासिकजीवनी का शिल्प’ विषयक व्याख्यान के दौरान धार्मिक एवं वैचारिक विरासत की चर्चा कर रहे थे।
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