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आकांक्षा पारे काशि‍व

हो गया प्यार का पंचनामा

हो गया प्यार का पंचनामा

नए जमाने की कहानियां अब इतने नए जमाने की हो गई हैं कि यह फिल्में सिर्फ एक खास पीढ़ी को ही अच्छी लग सकती हैं। प्यार का पंचनामा का पहला भाग भी ठीक ठाक चल गया था तो इसका सीक्वेल भी अच्छा चल जाने की पूरी उम्मीद है। पूरे देश के विश्वविद्यालय के छात्र भी अगर इस फिल्म को देख लेंगे तो निर्माता के पूरे पैसे वसूल हो जाएंगे।
हिंदूबहुल इलाका खुलना और काफिर का ब्रांड

हिंदूबहुल इलाका खुलना और काफिर का ब्रांड

कोलकाता से जब भारतीय सीमा के आखरी गांव बॉनगांव में रात रूकी तो कई बार एक ही सवाल पूछा गया, ‘बांग्लादेश क्यों जा रही हैं? वहां तो कुछ नहीं है।’ जवाब में ‘घूमने’ कहने पर लोगों की प्रतिक्रिया ऐसी होती थी जैसे कहना चाह रहे हों, ‘बेवकूफ।’
बांग्लादेश: 39 से घटकर 10 प्र‌तिशत रह गए हिंदू

बांग्लादेश: 39 से घटकर 10 प्र‌तिशत रह गए हिंदू

भारत का पड़ेसी, बांग्लादेश अब अशांत होने लगा है। धीरे-धीरे इस्लामिक कट्टरपंथ यहां पैर फैला रहा है। हिंदुओं के लिए यहां समस्या तो पहले से थी, लेकिन अब मसला सांप्रदायिकता से निकल कर धार्मिक कट्टरवाद की ओर बढ़ रहा है। यह उन्माद हिंदुओं के घुटन का कारण भी बन रहा है। इस देश के हालातों पर जायजे की पहली कड़ी।
आते ही छा गया प्रेम

आते ही छा गया प्रेम

सलमान खान यदि छींक भी दें तो उनके प्रशंसक उस खबर को जानना चाहते हैं। फिर यहां तो बात उनकी आने वाली नई फिल्म की है। दीवाली के मौके पर उनकी नई फिल्म प्रेम रतन धन पायो आने वाली है और हंगामा है कि अभी से बरप रहा है।
नहीं चमक सका रफ्तार सिंह

नहीं चमक सका रफ्तार सिंह

इस फिल्म का नाम सिंह इज ब्लिंग की बजाय सिंहनी इज ब्लिंग होना चाहिए। अगर फिल्म की दो सिंहनियों, सारा (एमी जैक्सन) और ऐमिली (लारा दत्ता) को निकाल दिया जाए तो इस 140 मिनट की फिल्म को 40 मिनट झेलना भी मुश्किल होगा।
एलपी रेकॉर्ड्स को सीडी की सौगात

एलपी रेकॉर्ड्स को सीडी की सौगात

रवीन्द्र संगीत के शौकीन और किसी वक्त में इसे सीखने वाले मलय घोष को अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि संगीत की यह शिक्षा एक दिन उनके लिए रोजी-रोटी का जरिया बनेगी।
यह कैलेंडर बदल दो

यह कैलेंडर बदल दो

साल तो आप नहीं बदल सकते, मगर पसंद न आने पर कैलेंडर तो बदल ही सकते हैं। तो यकीन मान कर चलिए यह ‘कैलेंडर’ अगला हफ्ता आते-आते तक बदल जाएगा।
चलताऊ गुंडे – मेरठिया गैंगस्टर

चलताऊ गुंडे – मेरठिया गैंगस्टर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का शहर मेरठ और वहां के कम पढ़े-लिखे बेरोजगार लड़के। वैसे ही जैसे खाली दिमाग शैतान का घर टाइप होते हैं। छोटी मोटी छेड़खानी और गुंडागर्दी से ही जिनका काम चलता है एक दिन उस समूह के लड़के अचानक खुद को एक बड़े गैंग के रूप में पाते हैं।
कट्टी-बट्टी - कट्टी ही रहेगी दर्शकों से

कट्टी-बट्टी - कट्टी ही रहेगी दर्शकों से

बॉलीवुड में पहली नजर के प्यार पर बनी फिल्मों की कोई कमी नहीं है। मैडी यानी माधव काबरा (इमरान खान) को पायल (कंगना रणौत) से पहली नजर का प्यार है। बिलकुल इंस्टेंट। मैगी वाला। यहां देखा, वहां प्यार। दिवाने माधव को यह भी मंजूर है कि पायल टाइमपास प्यार करेगी। ठीक है भई। नया जमाना है तो चल जाएगा।
हिंदी साहित्य के इंजीनियर

हिंदी साहित्य के इंजीनियर

गणित के कठिन सवालों के बीच गोदान का होरी भी जिंदगी के जवाब खोजता है। रसायन के सूत्र भले भूल जाएं मगर चंदर का सुधा भूल जाना अखरता है। प्रकाश के परावर्तन का नीरस सिद्धांत सुनील के केस को सुलझाते ही सरस लगने लगता है। ब्लैक बोर्ड पर अल्फा, बीटा, गामा के बीच निर्मला, चोखेरबाली और राग दरबारी भी धमाचौकड़ी मचाते हैं। अमूमन घरों में होशियार बच्चे विज्ञान पढ़ते हैं। विज्ञान में भी लड़के गणित और लड़कियां जीव विज्ञान पढ़ती हैं। जब कोर्स की किताबें ही साल में खत्म करना मुश्किल हो तो कहानी-कविताएं, उपन्यास पढ़ने के लिए किसके पास वक्त है। गणित लेने के बाद अर्जुन की आंख की तरह बस एक ही लक्ष्य है, आईआईटी। विज्ञान पढ़ रहे बच्चों के माता-पिता को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से कम कुछ भी गवारा नहीं है। मोटी-मोटी किताबों, सुबह से शाम तक चलने वाली कोचिंग क्लासों के बीच इंजीनियर बनने का सपना पलता है। ऐसे में साहित्य की कौन सोचे। पढ़ाई के दौरान साहित्य पढऩा समय की बर्बादी है और लिखना... इसके बारे में तो सोचना भी मत।
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