Advertisement

Search Result : "आलोक कुमार"

चर्चाः क्रिकेट के मोटी चमड़ी वाले आका | आलोक मेहता

चर्चाः क्रिकेट के मोटी चमड़ी वाले आका | आलोक मेहता

नेता, अफसर, शीर्ष उद्योगपति, डॉक्टर और आरोप सिद्ध होने पर स्वयं न्यायाधीश तक को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष नतमस्तक होकर न्यायिक आदेश का पालन करना होता है। लेकिन भारतीय क्रिकेट के आका मोटी चमड़ी वाले हैं। वे सुप्रीम कोर्ट के सामने भी बल्लेबाजी कर रहे हैं।
बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू, विदेशी भी नहीं मिलेगी

बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू, विदेशी भी नहीं मिलेगी

बिहार सरकार ने एक अहम फैसले में राज्य में आज से पूर्ण शराबबंदी लागू कर दिया है। इसके तहत अब राज्य में देशी शराब के साथ विदेशी शराब पर भी प्रतिबंध लग गया है।
चर्चाः उठ रहा पर्दा काले खातों का | आलोक मेहता

चर्चाः उठ रहा पर्दा काले खातों का | आलोक मेहता

भारतीय नेता यूं मीडिया को हर बात पर कोसते रहते हैं। लेकिन उन्हें कभी-कभी ईमानदार और साहसपूर्ण पत्रकारिता की तारीफ भी कर देनी चाहिए। आखिरकार बोफोर्स, टू जी स्पेक्ट्रम, कोयला घोटाले और विदेश में जमा काले धन और बैंक खातों का पर्दाफाश भारत के खोजी पत्रकारों ने ही किया है।
एनआईए अधिकारी की गोली मारकर हत्या, पत्नी गंभीर रूप से घायल

एनआईए अधिकारी की गोली मारकर हत्या, पत्नी गंभीर रूप से घायल

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) में तैनात एक अधिकारी की कल देर रात बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी और उनकी पत्नी को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
चर्चाः बराक ने दिखाया भारत को रंग | आलोक मेहता

चर्चाः बराक ने दिखाया भारत को रंग | आलोक मेहता

बराक ओबामा और नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन बैठकों के फोटो इस तरह प्रचारित हुए, जैसे उनकी तरह के मित्र दुनिया में नहीं हैं। लेकिन परमाणु सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए नरेंद्र भाई के ‘फ्रेंड’ बराक ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति के रूप में एक बार फिर भारत को पाकिस्तान की श्रेणी में खड़ा कर दिया।
चर्चाः नेताओं की कसमें, वायदे, वफादारी | आलोक मेहता

चर्चाः नेताओं की कसमें, वायदे, वफादारी | आलोक मेहता

जय-जयकार। तालियां। नया अध्याय पाटलिपुत्र के इतिहास का। बिहार विधानसभा की बैठक में सभी सदस्यों ने शराब न पीने की शपथ ली। राज्य सरकार ने एक अप्रैल से शराबबंदी के तहत ग्रामीण इलाकों में देशी और मसालेदार एवं भारत में बनी विदेशी शराब प्रतिबंधित कर दी। वहीं शहरी इलाकों में देशी शराब पर प्रतिबंध के साथ अधिकृत दुकानों पर भारत में बनी विदेशी शराब की बिक्री का प्रावधान किया गया है।
चर्चा : चुनावी अवश्वमेघ यज्ञ की तमन्ना। आलोक मेहता

चर्चा : चुनावी अवश्वमेघ यज्ञ की तमन्ना। आलोक मेहता

नरेंद्र मोदी चुनावी चुनौतियों को विजय यात्रा के रूप में मानते रहे हैं। उनके आत्मविश्वास और दिन-रात अभियान चलाने की क्षमता का लोहा उनके सहयोगी ही नहीं विरोधी तक मानते हैं। वह 2014 से निरंतर चुनावी सभाओं को संबोधित करते रहे हैं। चुनावी अश्वमेघ यज्ञ के लिए घोड़ा तैयार कर वह अखिल भारतीय स्तर पर एक ही अभियान में एकछत्र राज का प्रयास भी करना चाहते हैं।
चर्चाः  नेता, सेवक, बाबू या राजा । आलोक मेहता

चर्चाः नेता, सेवक, बाबू या राजा । आलोक मेहता

मध्य प्रदेश ने भी अपने विधायकों का वेतन एक लाख रुपये से ज्यादा कर दिया। उत्तर प्रदेश यह काम पहले ही कर चुका है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी तो विधायकों को हर महीने तीन लाख रुपया देना उचित मानती है। सांसदों का वेतन भी लगातार बढ़ रहा है।
किस गड्ढे में फंस रही नीतीश और गडकरी की गाड़ी

किस गड्ढे में फंस रही नीतीश और गडकरी की गाड़ी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय सडक़ एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी मिलकर बिहार की सडक़ों के हालात सुधारने की कोशिश में लगे हैं लेकिन गाड़ी कहीं न कहीं अटक जा रही है। चाहे वह सडक़ निर्माण के लिए जमीन के मुआवजे का मामला हो या फिर योजनाओं के लिए धनराशि का। इससे राज्य में सडक़ निर्माण की दिशा में तेजी से काम नहीं हो पा रहा है। यही नहीं, कुछ कंपनियों और ठेकेदारों से लेवी के नाम पर होने वाली वसूली से भी योजनाएं परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। नितिन गडकरी जहां सडक़ निर्माण के लिए गति देने के लिए जाने जाते हैं वहीं नीतीश कुमार की छवि सुशासन बाबू के रूप में मशहूर है, फिर भी योजनाओं को गति नहीं मिल पाने से माना जा रहा है कि कहीं न कहीं कुछ अड़चन है जो विकास की गति को मद्धिम कर रही है।
चर्चाः खजाने की उदारता और कंजूसी | आलोक मेहता

चर्चाः खजाने की उदारता और कंजूसी | आलोक मेहता

सरकारी खजाने से कल्याण की उम्मीद सदा रहती है। सत्ताधारी कांग्रेस हो अथवा भाजपा या आम आदमी पार्टी, हर वर्ष बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री जन-हित और सुविधाओं के लिए विभिन्न मदों में उदारतापूर्वक करोड़ों रुपयों का प्रावधान कर देते हैं। लेकिन साल के अंत में बही-खाता खोलने पर पता चलता है कि कई विभागों के लिए रखी गई धनराशि का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हुआ।
Advertisement
Advertisement
Advertisement