मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जो आज आईसीडीएस योजना के तहत अंडा दिए जाने की इतनी मुखालफत कर रहे हैं उन्होंने ही सात साल पहले होशंगाबाद जिले में अंडा दिए जाने का प्रस्ताव पारित किया था। उस समय वह मुख्यमंत्री थे। होशंगाबाद के आदिवासी ब्लॉक में अंडा दिए जाने के लिए उन्होंने प्रोजेक्ट शक्तिमान को हरी झंडी दी थी। इस प्रोजेक्ट का नाम फिल्मकार मुकेश खन्ना के सीरियल शक्तिमान के नाम पर था। प्रोजेक्ट के तहत कुपोषित बच्चों को उबला अंडा और उबले आलू देने का प्रावधान था लेकिन आज वही शिवराज सिंह हैं जो अंडा न दिए जाने की बात पर अटल हैं।
जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी की रैली में राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह की मौत मामले में नया मोड़ आता दिख रहा है। दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों की मानें तो आप नेता कुमार विश्वास द्वारा गजेंद्र को उकसाने के सबूत हाथ लगे हैं। दिल्ली पुलिस ने अपनी तहकीकात में पाया कि कुमार विश्वास के अलावा संजय सिंह और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी इस मामले की जानकारी थी। हालांकि, अभी तक इस मामले में सामने आए वीडियो फुटेज में गजेंद्र की मौत के पीछे आप नेताओं व कार्यकर्ताओं की भूमिका दिखाई नहीं पड़ती है।
केंद्र व राज्यों की भाजपा सरकारों के खिलाफ भू-अधिग्रहण को लेकर किसानों का असंतोष बढ़ता जा रहा है। मोदी सरकार की भूमि अधिग्रहण्ा नीति को सबसे पहले लागू करने वाले राजस्थान में अजमेर हवाई अड्डे के लिए हुए भू-अधिग्रहण के खिलाफ किसान आंदोलन पर उतारू हैं। गुरुवार को रूप सिंह नाम का एक किसान विस्थापन और पूरा मुआवजा न मिलने के विरोध में पानी की टंकी पर जा चढ़ा और जान देने की धमकी देने लगा।
ब्रेकिंग न्यूज देने के चक्कर में खबरों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना खबर को पुष्ट किए ही खबर चला दी जाती है और बाद में खबर गलत हो जाती है तो मिलती-जुलती खबर देकर मामले को दूसरा रुप दिया जाने लगता है। जंतर-मंतर पर गजेंद्र सिंह की खुदकुशी के मामले में भी कुछ ऐसा ही पढ़ने और देखने को मिल रहा है।
आम आदमी पार्टी की रैली के दौरान हुई किसान की खुदकुशी के मामले में दिल्ली पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट नयी दिल्ली क्षेत्र के जिलाधिकारी को सौंप दी है। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट में गजेंद्र की मौत का कारण दम घुटना बताया गया है। आगे की जांच अब नयी दिल्ली के जिलाधिकारी करेंगे।
23 अप्रैल 2015 को दौसा के गजेंद्र सिंह के रूप में देश के हाहाकार ने जंतर-मंतर पर दम तोड़ दिया। उसकी चीखती खामोशी को सत्ता और मीडिया की धडक़नों में एक और हाहाकार के रूप में धड़कना चाहिए था।
राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह की मौत के मामले में घिरी आम आदमी पार्टी ने अब उसके परिजनों को मनाने की कवायद तेज कर दी है। शुक्रवार को मीडिया के चौतरफा हमलों के बीच अाप के नेता संजय सिंह और पार्टी के कई विधायक गजेंद्र सिंह के परिजनों से मिलने दौसा जिले में उसके गांव नांगल झामरवाड़ा पहुंचे।
आम आदमी पार्टी की किसान रैली में आत्महत्या करने वाले गजेंद्र सिंह की मौत पर पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में केजरीवाल ने कहा, उस समय रैली जारी रखना मेरी गलती थी और मैं सबसे माफी मांगता हूं। इस मामले की पुलिस और मजिस्ट्रेट जांच चल रही है और जो भी इसका दोषी हो, उसे चाहे फांसी पर लटका दो। लेकिन बहस इसी पर केंद्रित होनी चाहिए कि किसान खुदकुशी क्यों कर रहे हैं।
देश की संसद से महज चंद किलोमीटर दूर जंतर-मंतर पर राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। तंगहाली और गरीबी से तंग गजेंद्र की मौत का तमाशा देखते रहे सभी। हजारों की तादाद में वहां लोग और पुलिसक्रमी मौजूद थे। सभी ने गजेंद्र को पेड़ पर चढ़ते हुए देखा और आत्महत्या की तैयारी करते हुए भी। देखते ही देखते गजेंद्र फंदे से झूल गया और चंद सेकेंड में उसके प्राण पखेरू उड़ गए। उस वक्त आप के तमाम बड़े नेता मंच पर मौजूद थे लेकिन भाषणबाजी का सिलसिला जारी रहा। सोशल मीडिया पर इस शर्मनाक घटना को लेकर जहां नेता, किसानों की बरबाद फसलों और मौतों पर अपनी रोटियां सेंक रहे हैं वहीं आम इंसान गजेंद्र की आत्महत्या से बेहद गुस्से में है।