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राम मंदिर आस्था का मुद्दा, विकास पर लड़ेंगे यूपी चुनाव: भाजपा

राम मंदिर आस्था का मुद्दा, विकास पर लड़ेंगे यूपी चुनाव: भाजपा

भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि पार्टी उत्तर प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ेगी न कि राम मंदिर के मुद्दे पर। पार्टी ने कहा कि राम मंदिर कभी चुनावी मुद्दा नहीं रहा है बल्कि यह देश के करोड़ों हिंदुओं के लिए एक आस्था का विषय है।
असम में गरजीं सोनिया, बोलीं लोगों को बांटते और घृणा फैलाते हैं मोदी

असम में गरजीं सोनिया, बोलीं लोगों को बांटते और घृणा फैलाते हैं मोदी

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विदेश दौरों के दौरान बड़े-बड़े बयान देने और देश में घृणा फैलाने का आरोप लगाया। अपनी चुनावी रैली में उन्होंने असम के मतदाताओं को सचेत किया कि भाजपा की कथित सांप्रदायिक राजनीति का नियंत्रण नागपुर से होता है।
बंगाल चुनाव में भ्रष्टाचार बना सबसे अहम चुनावी मुद्दा

बंगाल चुनाव में भ्रष्टाचार बना सबसे अहम चुनावी मुद्दा

बंगाल में होने जा रहे चुनाव में भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दा बन गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) शासित बंगाल में लोकतंत्र की बहाली के अलावा कांग्रेस-वाम मोर्चा गठबंधन ने सारदा घोटाले और नारद स्टिंग ऑपरेशन के रूप में भ्रष्टाचार को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया है। गौरतलब है कि सारदा घोटाले में लाखों निवेशकों के रूपये डूब गए थे जबकि नारद स्टिंग ऑपरेशन में टीएमसी के कुछ नेताओं को घूस लेते हुए दिखाया गया है।
मोदी बताएं क्यों अभी तक विदेश में हैं माल्या और ललित मोदी: राहुल

मोदी बताएं क्यों अभी तक विदेश में हैं माल्या और ललित मोदी: राहुल

कांग्रेस उपाध्याक्ष राहुल गांधी ने असम में एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। राहुल ने अपने भाषण में मोदी से पूछा कि आपने विदेशों से कालाधन लाने की बात की थी तो शराब कारोबार के बेताज बादशाह विजय माल्या और आईपीएल के पूर्व प्रमुख ललित मोदी अब तक विदेश में क्यों हैं।
चर्चा : चुनावी अवश्वमेघ यज्ञ की तमन्ना। आलोक मेहता

चर्चा : चुनावी अवश्वमेघ यज्ञ की तमन्ना। आलोक मेहता

नरेंद्र मोदी चुनावी चुनौतियों को विजय यात्रा के रूप में मानते रहे हैं। उनके आत्मविश्वास और दिन-रात अभियान चलाने की क्षमता का लोहा उनके सहयोगी ही नहीं विरोधी तक मानते हैं। वह 2014 से निरंतर चुनावी सभाओं को संबोधित करते रहे हैं। चुनावी अश्वमेघ यज्ञ के लिए घोड़ा तैयार कर वह अखिल भारतीय स्तर पर एक ही अभियान में एकछत्र राज का प्रयास भी करना चाहते हैं।
असम चुनाव: भाजपा का दृष्टिपत्र जारी, घुसपैठ पर लगाम का वादा

असम चुनाव: भाजपा का दृष्टिपत्र जारी, घुसपैठ पर लगाम का वादा

असम विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को पार्टी का दृष्टिपत्र जारी किया। अपने दृष्टिपत्र में भाजपा ने वर्तमान मुख्यमंत्री तरुण गोगोई पर घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए इसे रोकने का वादा किया है।
डीए: मोदी सरकार का चुनावी राज्यों पर दबाव, ममता बौखलाईं

डीए: मोदी सरकार का चुनावी राज्यों पर दबाव, ममता बौखलाईं

कर्मचारियों के लिए छह फीसद महंगाई भत्ते (डीए) की किश्त की घोषणा कर केन्द्र सरकार ने चुनावी राज्यों वाली सरकारों पर दबाव बना दिया है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केन्द्र की मोदी सरकार की घोषणा से बौखलाई बताई जा रही हैं, क्योंकि वहां सरकारी कर्मचारियों के स्तर पर चुनौतियां ज्यादा हैं। बंगाल सरकार के कर्मचारियों तनख्वाह केन्द्र से अब 54 फीसद कम हो गई है। अब ममता बनर्जी राज्य सरकार के कर्मचारियों को खुश करने का रास्ता ढूंढ रही हैं। यही हाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में भी है। हालांकि, इन राज्यों में तनख्वाहें छह से 12 फीसद ही कम हैं। इसलिए, कर्मचारियों की नाराजगी की चिंता नेताओं को कम है।
एसिड हमले के ईलाज का पूरा खर्च देगी राज्य सरकार: बादल

एसिड हमले के ईलाज का पूरा खर्च देगी राज्य सरकार: बादल

पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि गुरदासपुर जिले में एसिड हमले की शिकार महिला के ईलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी और आगे ईलाज के लिए उसे फोर्टिस अस्पताल लुधियाना के बर्न यूनिट में भेजा जाएगा।
बंगाल में चुनाव खर्च सीमा को धता बताने का रोडमैप

बंगाल में चुनाव खर्च सीमा को धता बताने का रोडमैप

चुनाव आयोग डाल-डाल और राजनीतिक पार्टियां पांत-पांत। बंगाल के विधानसभा चुनाव में जिस तरह से सरगर्मी दिख रही है, उससे साफ है कि पैसा पानी की तरह बहाने की तैयारी है और राजनीतिक दलों ने इसके रास्ते पहले से ही तैयार कर रखे हैं। चुनाव आयोग के मापदंडों के हिसाब से पार्टियां चलें तो एक राजनीतिक दल अधिकतम 82 करोड़ रुपए खर्च कर पाएगा। लेकिन तैयारी इससे कई गुना ज्यादा उड़ाने की है।
चर्चाः धन जनता का, चमके चेहरे मंत्रियों के | आलोक मेहता

चर्चाः धन जनता का, चमके चेहरे मंत्रियों के | आलोक मेहता

रेडियो पर एक गाना बहुत बजता है- ‘चेहरा न देखो, चेहरे ने लाखों को लूटा।’ यों यह गीत प्यार-मोहब्बत से जुड़ा है। लेकिन नेताओं-मंत्रियों के लिए इन शब्दों के अलग-अलग अर्थ लगाए जाते हैं। भोली भाली जनता चेहरे और वायदे पर वोट दे देती है। फिर खून-पसीने की मेहनत की कमाई का एक हिस्सा टैक्स के रूप में सरकारी खजाने को देती है। इसी सरकारी खजाने की रकम से सरकार में बैठे प्रभावशाली नेता-मंत्री अपना चेहरा चमकाए रखना चाहते हैं।
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