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असम जीतने के हफ्ते भर में पूर्वोत्तर पर सौगातों की झड़ी

असम जीतने के हफ्ते भर में पूर्वोत्तर पर सौगातों की झड़ी

असम में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार गठन के हफ्ते भर के भीतर ही केंद्र सरकार ने समूचे पूर्वोत्तर में सौगातों की झड़ी लगा दी है। असम समेत पूर्वोत्तर के सभी राज्यों को विशेष राज्य की दर्जा देकर ढेरों आर्थिक पैकेज दिए गए हैं। पूर्वोत्तर के मिजोरम और मणिपुर को रेलवे के ब्रॉडगेज नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। इसके अलावा भी ढांचागत और सामाजिक क्षेत्र की दसियों परियोजनाएं असम और पूर्वोत्तर के लिए घोषित की गई हैं।
मोदी की मंत्रियों को दो टूक, विकास मुंहजबानी रखो याद, तभी जनता को बता पाओगे

मोदी की मंत्रियों को दो टूक, विकास मुंहजबानी रखो याद, तभी जनता को बता पाओगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों को साफ निर्देश दिया है कि सरकार के पिछले दो साल के विकास कार्यों को मुंहजबानी याद रखो, तभी इसे आप जनता के सामने बेहतर ढंग से रख पाओगे। केन्द्र में मोदी सरकार के दो साल पूर्ण होने की पूर्व संध्या पर मंत्रिपरिषद की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सहयोगी मंत्रियों से सरकार द्वारा की गई पहल को जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के लिए ध्यान केंद्रित करने को कहा।
‘भाजपा एकमात्र बड़ी पार्टी होगी’

‘भाजपा एकमात्र बड़ी पार्टी होगी’

मोदी सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर इन बातों की चर्चा स्वाभाविक है कि आगे क्या होगा। क्या मोदी अगले वर्ष तक भी इतने ही शक्तिशाली बने रहेंगे? भाजपा का अगला कदम क्या होने वाला है? उत्तर प्रदेश के चुनाव में क्या होने वाला है?
बंगाल में ममता की आंधी, केरल ने वामो के घावों पर मरहम लगाया

बंगाल में ममता की आंधी, केरल ने वामो के घावों पर मरहम लगाया

ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस की आंधी में कांग्रेस और वाममोर्चा उखड़ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया है। तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस को मिले वोटों का प्रतिशत बढ़ा है। भारतीय जनता पार्टी ने वाममोर्चा के वोटों में सेंध लगाई है। कई इलाकों में भारतीय जनता पार्टी के वोट तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों के खाते में ट्रांसफर हुए हैं।
चर्चाः कुरुक्षेत्र नहीं काशी के रास्ते रथ | आलोक मेहता

चर्चाः कुरुक्षेत्र नहीं काशी के रास्ते रथ | आलोक मेहता

युग बदल गया है। अब कुरुक्षेत्र में सत्ता के लिए आमने-सामने संघर्ष नहीं होता। सोमनाथ से अयोध्या की रथयात्रा ने भारतीय जनता पार्टी को पहली बार सत्ता दिलाई। सोमनाथ की तरह काशी (बनारस-वाराणसी) भी आजादी के बाद राजनीतिक सत्ता संघर्ष का एक बड़ा केंद्र रहा है।
लोकसभा में उठी बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग

लोकसभा में उठी बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग

बिहार के गया में जदयू की महिला पार्षद के पुत्र द्वारा एक युवक को कथित रूप से गोली मारने की घटना की गूंज आज लोकसभा में सुनाई दी। बिहार के कुछ सांसदों ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब होने का उल्लेख करते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की।
‘आखिर महाराज देखना क्या चाहते थे, जनता को बताएं?’

‘आखिर महाराज देखना क्या चाहते थे, जनता को बताएं?’

सोशल मीडिया पर उन्नाव से भाजपा सांसद साक्षी महाराज का एक विवादित वीडियो वायरल हो रहा है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में पुलिस कार्रवाई के दौरान एक लड़की के साथ कथित तौर पर मारपीट एवं बलात्कार की कोशिश की गई। बताया जा रहा है कि जख्म दिखाने के लिए उस लड़की को सभी के सामने जींस के बटन खोलने के लिए कहा गया। आरोप है कि महाराज ने लड़की की जींस के बटन खुलवाकर उसके जख्म देखने चाहे। इसे लेकर सोशल मीडिया पर साक्षी महाराज की तीखी आलोचना हो रही है। कोई इसे गंदी बात लिख रहा है तो कोई शर्मनाक बता रहा है।
चर्चाः सांसद बाजा बजाएं, तो काम भी करें | आलोक मेहता

चर्चाः सांसद बाजा बजाएं, तो काम भी करें | आलोक मेहता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के सांसदों को सलाह दी है कि वे अपने संसदीय क्षेत्रों-गांवों में जाकर जन कल्याण योजनाओं और सफलताओं की जानकारियां दें। मतलब भाजपा सरकार के दो वर्ष (26 मई) पूरे होने के अवसर पर अपना बाजा बजाएं।
मुख्यमंत्री के जनता दरबार में नीतीश पर युवक ने फेंकी चप्पल

मुख्यमंत्री के जनता दरबार में नीतीश पर युवक ने फेंकी चप्पल

बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को जनता दरबार कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर एक युवक ने चप्पल फेंकीं। हालांकि चप्पल नीतीश कुमार को नहीं लगी और उनकी बगल में जाकर गिरी। जिसके बाद वहां मौजूद सुरक्षा बलों ने उस युवक को गिरफ्तार कर लिया।
चर्चाः राजधानी में दादागिरी | आलोक मेहता

चर्चाः राजधानी में दादागिरी | आलोक मेहता

दिल्ली सचमुच निराली है। दुनिया के किसी देश की राजधानी में नेता, अधिकारी, पुलिस, टैक्सी-ऑटो-बस चालक और ढाबा चलाने वाले ऐसी दादागिरी नहीं करते। यहां मुख्यमंत्री केजरीवाल स्वयं मनमाने ढंग से आदेश जारी करते हैं और डेढ़ करोड़ जनता की इच्छा बता देते हैं। सीधे प्रधानमंत्री को चुनौती देते रहते हैं और प्रचार पर पांच सौ करोड़ रुपये खर्च कर देते हैं।
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