पीएम नरेंद्र मोदी की नोटबंदी अब धीरे धीरे अपना असर दिखाने लगी है। कामगार वर्ग इस कदम से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। किसानों और सब्जी उत्पादकों को औने पौने दाम में अपने उत्पाद बेचने पड़ रहे हैं। मजदूरों की रोजी पर भी संकट आन पड़ा है। नोटबंदी से मंडियों में सब्जियों के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं।
सब्जियों के साथ अन्य खाद्य वस्तुओं के दामों में कमी से सितंबर माह में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति घटकर 3.57 प्रतिशत पर आ गई है। अगस्त में यह 3.74 प्रतिशत पर थी।
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर के अनुसार, भारत ने रक्षा खरीद में बढ़ोतरी की है। साथ ही, देश में बने आयुधों का निर्यात भी बढ़ा है। मौजूदा वित्त वर्ष में अगले तीन महीने में 50 हजार से 60 हजार करोड़ रपये के और रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इससे उनके कार्यभार संभालने के बाद इस क्षेत्र में जारी कुल आर्डर 3,000 अरब रुपए का हो जाएगा।
भारत और चीन एक-दूसरे के साथ आर्थिक संबंध मजबूत कर रहे हैं। जुलाई 2016 तक चीन ने भारत में 4.1 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। दोनों देशों के बीच कारोबार में बढ़ोतरी हुई है। गोवा में होने जा रहे ब्रिक्स सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आएंगे। तब भारत और चीन के बीच कई नए व्यापारिक और आर्थिक करार होने हैं।
सब्जियों, दालों और चीनी के दाम बढ़ने से थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति भी जुलाई माह में तेजी से बढ़ती हुई 3.55 प्रतिशत पर पहुंच गई। थोक मुद्रास्फीति का यह पिछले 23 माह का उच्चतम स्तर है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दूध का खुदरा कारोबार करने वाली इकाई मदर डेयरी ने दूध के एक लीटर और आधा लीटर के पैक के दाम में प्रति पैकेट एक-एक रुपये की वृद्धि की घोषणा की।
बीफ यानी गाय के मांंस पर प्रतिबंध और चमड़े के परिवहन में आ रही दिक्कत के बाद क्रिकेट की गेंद के दामों में दोगुनी बढ़ोतरी हो गई है। जो गेंद एक साल पहले 400 रुपए की मिलती थी वहीं अब 800 रुपए की मिल रही है। उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बीफ पर बैन है। इसके अलावा गाय के चमड़ेे का परिवहन करने में अब ट्रांसपोर्टर रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस वजह से गाय के चमड़े की किल्लत हो गई है। गाय के चमड़े से क्रिकेट की लाल गेंद बनाई जाती है। एक गाय के चमड़े से करीब तीन दर्जन गेंद तैयार की जा सकती हैं।
मेहरबान मोदी सरकार ने केंद्र सरकार से जुड़े 47 लाख कर्मचारियों का वेतन ढाई गुना बढ़ा दिया। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर अधिकारियों-सचिवों ने रिकार्ड तोड़ फुर्ती से वेतन बढ़ोतरी का इंतजाम कर दिया। फिर भी कर्मचारी संगठन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।